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कोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज का रिहायशी हिस्सा खोलने की दी इजाजत

Sat, 12 Sep 2020 09:15 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Sat, 12 Sep 2020 09:15 PM IST
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court gave instructions to open the residential part of Nizamuddin Markaz and hand it to the family of Maulana Saad
निजामुद्दीन मरकज - फोटो : फाइल फोटो

अदालत ने निजामुद्दीन मरकज के रिहायीश हिस्से को खोलने और इसकी चाबी मौलाना  साद के परिजनों को आदेश मिलने के पांच दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया है। इसकी सुपुर्दगी से पहले जांच एजेंसी इस हिस्से का निरीक्षण कर सकती है।

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अदालत ने साद की मां तथा परिजनों को लिखित आश्वासन देने के लिए कहा है कि वह जांच को किसी भी तरह बाधित नहीं करेंगे तथा रिहायशी हिस्से का प्रयोग केवल वहां रहने के लिए किया जाएगा और वह मरकज तथा परिसर के किसी अन्य हिस्से में नहीं जाएंगे।
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साकेत जिला अदालत की सीएमएम गुरमोहिना कौर ने शुक्रवार के अपने आदेश में कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को संविधान ने जीवन तथा स्वतंत्रता का अधिकार दिया है और रिहायशी संपत्ति में प्रवेश का अधिकार भी उसमें शामिल है।
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अदालत ने कहा यह कोर्ट संपत्ति के मालिकाना हक का निर्धारण करने के लिए उपयुक्त मंच नहीं है। आवेदकों ने केवल संपत्ति खोलने का अनुरोध किया था। आवेदक तथा उसका परिवार उस हिस्से में रहता है। उनके इस अधिकार पर किसी भी एजेंसी आज तक सवाल खड़ा नहीं किया है।

अदालत ने इस बात पर गौर किया कि एसडीएम के आदेश पर परिसर को सैनिटाइज करने के बाद बंद कर चाबियां पुलिस को सौंप दी गई थीं क्योंकि वहां कई एजेंसियों को निरीक्षण करना था। इसके बाद भी किसी एजेंसी उसका निरीक्षण नहीं किया। इसलिए जांच एजेंसियों को पांच दिनों में इसके निरीक्षण का मौका दिया जा रहा है।

कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान विशेष अभिोजन अधिकारी ने कहा कि परिसर को किसी कानून के तहत नहीं बल्कि केवल घटनास्थल तथा साक्ष्यों को संरक्षित करने के लिए लॉक किया गया था। इसकी चाबियां दिल्ली पुलिस के पास हैं और जांच अभी चल रही है।


वहीं साद की मां खालिदा की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि अभियोजन के अनुसार परिसर की चाबियां दिल्ली पुलिस के पास हैं और पिछले छह माह से आवेदक और उसके परिवार का इसमें प्रवेश बंद है। किसी भी कानून के मुताबिक किसी को भी संपत्ति में निवास के अधिकार से रोका नहीं जा सकता। इस परिसर को पेश मामले में 31 मार्च 2020 को दर्ज एफआईआर के बाद खाली करवाकर बंद कर दिया गया था।

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