दंगा और तीन सिखों की हत्या पर फैसला जल्द
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दिल्ली की कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय बंसल ने 1984 सिख दंगा के दौरान पुल बंगश इलाके में तीन सिखों की हत्या के मामले में बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मामले में जिरह पिछली तारीख पर पूरी हो गई थी। अदालत इस मामले में 12 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी।
सीबीआई ने दो अप्रैल 2009 को आरोपी सुरेश कुमार पानेवाला के खिलाफ दंगा, गंभीर रूप से घायल करने, आगजनी और हत्या संबंधी धाराओं में चार्जशीट पेश की थी।
तीन लोगों को जिंदा जलाया था
दूसरी ओर कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को क्लीन देते हुए उनके पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। पुलबंगश इलाके में हुए दंगों में तीन नवंबर 1984 को गुरबचन सिंह, बादल सिंह और ठाकुर सिंह को जलाकर मार दिया गया था।
पुलिस ने दंगों के सिलसिले में 31 लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन मुकदमों की सुनवाई के बाद सभी बरी हो गए थे। नानावती जांच आयोग की सिफारिश के मद्देनजर सरकार ने 2005 में सिख दंगों की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था।
टाइटलर को सीबीआई ने दी थी क्लीन चिट
सीबीआई ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के पक्ष में मार्च 2009 में क्लोजर रिपोर्ट दी थी। जिसे एसीएमएम राकेश पंडित की अदालत ने 27 अप्रैल 2010 को स्वीकार कर लिया था।
सीबीआई ने जसबीर सिंह और सुरेंद्र सिंह के बयान को विरोधाभासी बताते हुए क्लीन चिट दी थी। जांच एजेंसी का कहना था कि जिस दिन टाइटलर पर दंगों में शामिल होने का आरोप है, उस दिन वह इंदिरा गांधी के पार्थिव शरीर के पास तीन मूर्ति भवन में थे।
यह बात दूरदर्शन की सीडी से सामने आई है। सीबीआई ने इससे पहले भी सितंबर 2007 में टाइटलर के मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।
दंगा पीड़ित ने क्लीन चिट को दी थी चुनौती
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट और निचली अदालत के आदेश को लोकेंदर कौर ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने जांच के दौरान कई सबूतों की अनदेखी की और कई चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए।
याचिका में कहा गया कि सीबीआई ने दंगों के चश्मदीद रेशम सिंह, संतोख सिंह, चंचल सिंह और आलम सिंह के बयान दर्ज नहीं किए।
सत्र अदालत ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद दस अप्रैल 2013 को सीबीआई की क्लीन चिट और मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने वाले आदेश को खारिज कर दिया था। अदालत ने तीसरी बार सीबीआई को आगे जांच का आदेश दिया था।