कोर्ट ने राजधानी में मैला ढोने वालों का होना बताया शर्मनाक, पूछा- क्या गधे हैं कर्मचारी?
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हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर कड़ी नाराजगी जताई है कि वर्तमान में भी राजधानी में मैला ढोने वाले हैं। अदालत ने कहा कि यह यह काफी शर्मनाक है यह हालत तब है जब कानून में मैला ढोना प्रतिबंधित है।
इतना ही नहीं कर्मचारियों को परिवहन की भी सुविधा नहीं देने पर अदालत ने कहा-क्या कर्मचारी गधे हैं जो अपने औजार पीठ पर लादकर चलेंगे। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सफाई कर्मचारियों की दशा पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि भारत गरीब लोगों का देश है, लेकिन गरीब लोगों के लिए यहां कोई नहीं।
अदालत मैला ढोने वालों के पुनर्वास की मांग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान दिल्ली राज्य विधिक सेवा आयोग (डीएलएसए) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दिल्ली के विभिन्न इलाकों में 233 मैला ढोने वाले लोग हैं।
'कानून के तहत मैला ढोने वालों का होना चाहिए पुनर्वास'
इस पर अदालत ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड व नगर निगम अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में एक भी मैला ढोने वाले के न होने की बात आखिर किस आधार पर कही थी। इन सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट में पूरी तरह घपला नजर आता है।
अदालत ने जल बोर्ड व नगर निगम को फटकार लगाते हुए मैला ढोने वालों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 10 अगस्त तय की है।
अदालत ने कहा कि मैला ढोने वालों के रोजगार निषेध व पुनर्वास अधिनियम 2013 होने के बावजूद भी उनका होना शहरवासियों के लिए अपमानजनक है। कानून के तहत मैला ढोने वालों का पुनर्वास होना ही चाहिए।
डीएलएसए के सदस्य सचिव धर्मेश शर्मा ने अदालत को बताया कि मैला ढोने वाला एक व्यक्ति तो स्नातक है तो अदालत ने कहा कि ये बहुत चौंकाने वाला और हास्यप्रद बात है। अदालत ने कहा कि जिन लोगों को मैला ढोने वालों के रूप में पहचान हुई है उन्हें सहायता प्रदान की जाए और कानून के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाए।
104 लोग हैं निगम और जलबोर्ड के स्थायी कर्मचारी
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 10 लॉ स्टूडेंट के साथ उन्होंने दिल्ली के विभिन्न इलाकों का दौरा किया, जिससे यह जानकारी निकलकर आई कि मैला ढोने वाले दिल्ली में किसी व्यवसाय की तरह है।
इन्हें दैनिक मजदूरी पर दिल्ली से बाहर भी ले जाया जाता है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिया था कि वह सीवरलाइन व नाले साफ करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षात्मक औजार व सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए।
104 लोग निगम और जलबोर्ड के स्थायी कर्मचारी
डीएसएसए ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि उन्होंने 1000 सफाई कर्मचारियों से पूछताछ की, जिसमें से 233 मैला ढोने वालों की पहचान हुई। इनमें 104 लोग नगर निगम व जल बोर्ड के स्थायी कर्मचारी हैं।
129 को निजी ठेकेदार के माध्यम से रखा गया है, वहीं 11 उच्च जाति समुदाय से हैं। रिपोर्ट के अनुसार एजेंसियों द्वारा इन्हें सुरक्षा के कोई उपकरण भी नहीं दिए गए हैं। जल बोर्ड ने कुछ लोगों को हेलमेट, बेल्ट, गमबूट व रस्सा आदि दिया है लेकिन इनके पास आवाजाही का कोई साधन नहीं है और इन्हें काम के चलते एक जगह से दूसरी जगह आना-जाना पड़ता है।