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पति से योग्य महिला को स्वयं कमाना चाहिए न कि पति पर निर्भर रहें
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 27 Mar 2017 09:32 AM IST
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अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में महिला द्वारा अंतरिम गुजारा भत्ता राशि को बढ़ाने के संबंध में दायर याचिका खारिज कर दी। महिला ने तर्क रखा था कि वह अपने पति से योग्य है और वह घर में बेकार बैठी है व पति की आय पर निर्भर है। अदालत ने कहा जब वह पति से बेहतर है तो उसे घर पर बेकार नहीं बैठना चाहिए।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर के त्रिपाठी ने महिला के उस तर्क को खारिज कर दिया कि वह पति से ज्यादा योग्य है ऐसे में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उसे प्रदान प्रति माह गुजारे भत्ते की राशि 5500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए।
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अदालत ने कहा अपीलकर्ता महिला के पास एमए, बी.एड और एलएलबी की डिग्री है। उसने स्वयं को पति से अधिक योग्य होने का दावा किया है, ऐसे में वह खुद कमा सकती है और घर पर बेकार नहीं बैठना कर पति की आय पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
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पत्नी ने कैसे राशि बढ़ाने की मांग की
मजिस्ट्रेटी अदालत ने 2008 में महिला को प्रति माह 5000 रुपये बतौर गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था। वर्ष 2015 में इस राशि में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। सत्र न्यायाधीश ने 2015 में मजिस्ट्रेट द्वारा दिए फैसले का उचित ठहराते हुए कहा समाज में प्रचलित व्यावहारिक वास्तविकताओं पर ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा मजिस्ट्रेट ने 2008 और 2012 में रहने की लागत को ध्यान में रखते हुए यह राशि तय की थी। अदालत ने कहा वे यह समझने में असफल हैं कि पत्नी ने कैसे राशि बढ़ाने की मांग की है और वह पति की कितनी आय है यह भी साबित करने में असफल रही है।
उन्होंने कहा मजिस्ट्रेट ने 2008 और 2012 में रहने की लागत को ध्यान में रखते हुए यह राशि तय की थी। अदालत ने कहा वे यह समझने में असफल हैं कि पत्नी ने कैसे राशि बढ़ाने की मांग की है और वह पति की कितनी आय है यह भी साबित करने में असफल रही है।