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सार्वजनिक शौचालयों की हालत पर कोर्ट नाराज
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 21 Jan 2016 04:21 AM IST
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हाईकोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों की हालत में सुधार न करने पर तीनों एमसीडी के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने एमसीडी द्वारा पेश रिपोर्ट को फर्जी करार देते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व संजीव सचदेव की खंडपीठ ने एमसीडी के उस तर्क पर भी हैरानी जताई कि मैला उठाने वाला एक भी कर्मचारी नहीं है और न ही इस संबंध में सर्वे है।
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अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या मैला ढोने वाले नगर निगम कार्यालय में गंदगी डालें तभी उनकी पहचान हो सकेगी। खंडपीठ ने कहा कि पेश रिपोर्ट में उत्तरी दिल्ली में 617 सैनेटरी लैटरीन (कच्चे शौचालय), पूर्वी दिल्ली में 738 व सबसे अधिक दक्षिणी दिल्ली में कुल 2008 सैनेटरी लैटरीन है।
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लेकिन इन लैटरीन से गंदगी उठाने वाले एक भी नहीं है। अदालत ने कहा कि सैनेटरी लैटरीन को जब तक मशीनों से साफ करने की व्यवस्था नहीं होती तब तक तो मैला ढोने वाले चाहिए ही।
अदालत के पूछने पर निगम अधिवक्ता ने कहा की मैला ढोने वालों की गणना के लिए सर्वे कराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मैला ढोने वालों की पहचान ही नहीं हो पाती है।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा की अब क्या मैला ढोने वाले निगम कार्यालयों में गंदगी डालें तभी उनकी पहचान हो सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।