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दिल्ली में मिले डायनासोर के पूर्वज, इनकी ये खासियत हमारे लिए है लाभदायक

Sun, 19 Aug 2018 11:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 19 Aug 2018 11:40 AM IST
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counting of odonata family species is being done in delhi, they are helpful for ecosystem
dianosaur - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में पहली बार डायनासोर के पूर्वज ओडोनाटा परिवार के कीट प्रजातियों की गिनती हुई है। जो हमें मलेरिया, डेंगू जानलेवा मच्छरों से बचाते हैं। इनका नाम ड्रैगनफ्लाइज और डैम्सफ्लाइज है।
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अक्सर बचपन में हम इन्हें हेलीकॉप्टर कीट कहकर या पुछल्ले पर धागा बांधकर उड़ाया भी करते थे। नम भूमि और साफ पानी में जन्म लेने वाले इन कीटों की संख्या दुनिया में तेजी से कम हो रही है। अच्छी खबर यह है कि दिल्ली में अब भी इनकी मौजूदगी है।
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पहली बार हुई गिनती में यमुना बॉयोडायवर्सिटी पार्क में इनकी 25 प्रजातियां, नीला हौज बायोडयावर्सिटी पार्क में 9 प्रजाति और तिलपथ वैली बॉयोडायवर्सिटी पार्क में 5 प्रजातियां मिली हैं।
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बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएचएनएस) के केंद्र प्रबंधक सोहेल मदान के नेतृत्व में यह काम शुरू हुआ है। यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में कीट वैज्ञानिक मोहम्मद फैसल ने कीट प्रजातियों की गिनती की।

क्या होता है ओडोनाटा का मतलब

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मदान ने बताया कि गिनती के लिए महीनों से तैयारी चल रही थी। कई लोगों को प्रशिक्षित किया गया। 11 टीमों ने दिल्ली, हरियाणा और आसपास गिनती की। 1 सितंबर को इस गिनती की विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी। इस काम में वर्ल्ड वाइल्ड फंड इंडिया भी सहयोगी है। ड्रैगनफ्लाई की गिनती का काम हर साल किया जाएगा।

ओडोनाटा का मतलब जबड़े वाला जीव
मदान ने बताया कि ओडोनाटा का मतलब जबड़े वाले जीव से है। पहले इनकी लंबाई करीब 20 इंच तक होती थी। इनके जबड़े बड़े सख्त होते हैं। विकास क्रम में इनकी लंबाई घटकर 3 से 4 इंच तक हो गई है।

इनका होना पारस्थितिकी और मानवजाति के लिए बेहद ही जरूरी है। यह एक प्रकार से अच्छे और साफ वेटलैंड और जलाशय के प्रतीक भी हैं। जब मच्छरों के कारण लोगों की मौत हो रही है तो ऐसे में इन्हें नष्ट करने वाले इन कीटों की बेहद जरूरत है।

धरती पर पहली बार उड़ान भरने वाला कीट

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यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के प्रभारी और वैज्ञानिक डॉ. फैयाज ए. खुदसर ने कहा कि यह डायनासोर से भी पुराने कीट हैं। करीब 22 करोड़ वर्ष पूर्व इनका जन्म हुआ। यह धरती पर पहली उड़ान भरने वाले कीट भी हैं। इनका परिवार काफी समृद्ध होता था क्योंकि पहले साफ जलाशय थे। अब अतिक्रमण के कारण न तो नम भूमि बची है और न ही साफ जलाशय। ऐसे में इनकी आबादी तेजी से घट रही है।

ड्रैगनफ्लाई का लारवा भी खाता है मच्छरों के अंडे
डॉ. फैयाज ने बताया कि ओडोनाटा परिवार के इन ड्रैगन कीट लारवा को नायड्स कहते हैं। साफ पानी ही इनके जीवन की शर्त है। आमतौर पर यह लारवा 6 से 8 महीने पानी में रहते हैं। इस दौरान इनका आहार मच्छरों के अंडे होते हैं। कुछ लारवा 6 से 8 वर्ष तक पानी में मौजूद रहते हैं। वहीं वयस्कड्रैगन कीट का आहार भी खून चूसने वाले मच्छर ही हैं।

दिल्ली में मिले यह अहम कीट
यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में ब्लू डार्नर, पाइड पैडी स्कीमर, कॉमन पिक्चर विंग, ग्रैनाइट घोस्ट, कोरोमंडेल मार्स डार्ट, औरेंज टेल्ड मार्स टार्ड ब्लू टेल्ड फॉरेस्ट हॉक आदि प्रजाति मिली है। विश्व में इनकी 5329 प्रजातियां हैं।

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