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केजरीवाल की दिल्ली में बढ़ा भ्रष्टाचार, भाजपा शासित एमसीडी में घूसखोरी हुई कम: रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 02 Nov 2018 07:55 PM IST
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फाइल फोटो
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इंडिया अगेंस्ट करप्शन से लोगों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाकर सियासत में उतरे अरविंद केजरीवाल के शासन में दिल्ली में भ्रष्टाचार बढ़ा है। खासकर उन विभागों में जिन पर सिर्फ दिल्ली सरकार का प्रशासनिक अधिकार है, उनमें ही सबसे अधिक भ्रष्टाचार बढ़ा है। वहीं भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रही भाजपा शासित एमसीडी में भ्रष्टाचार कम हुआ है। इस बात का खुलासा ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल और सीएमएस इंडिया के सर्वे में हुआ है।
सर्वे के मुताबिक पूरे भारत में दिल्ली में भ्रष्टाचार नवें नंबर पर है जबकि भाजपा शासित गुजरात सबसे कम भ्रष्ट है। साल 2018 के सर्वे में शामिल लोगों में से 46 फीसदी लोगों ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अपना कोई काम करवाने के लिए किसी न किसी सरकारी अधिकारी को घूस दिया।
सर्वे के मुताबिक साल 2015 में जब केजरीवाल ने सत्ता संभाली थी, दिल्ली के 20% लोगों ने यह स्वीकार किया था कि राजधानी में करप्शन होता है। साल 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 25 फीसदी पहुंच गया। वर्ष 2018 में 34 फीसदी लोगों ने भ्रष्टाचार में घूस देने की बात स्वीकार किया।
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सीएमएस कंपनी के मुताबिक साल 2016 में दिल्ली के सिर्फ 16 फीसदी परिवारों ने यह स्वीकार किया था कि राजधानी में भ्रष्टाचार होता है। उस समय राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 31 फीसदी था। जबकि इस वर्ष यानी 2018 में दिल्ली के 29 फीसदी परिवारों ने दिल्ली में भ्रष्टाचार होने की बात स्वीकार किया। इस लिहाज से दिल्ली में भ्रष्टाचार का स्तर राष्ट्रीय स्तर से भी दो फीसदी अधिक पाया गया है।
पूरे राष्ट्रीय स्तर पर लोगों से यह सवाल किया गया कि पिछले एक साल में उन्होंने कितनी बार सरकारी अधिकारियों को घूस दिया? इस सवाल के जवाब में गुजरात के लोगों ने सबसे कम बार घूस देने की बात स्वीकार किया। जबकि राजधानी दिल्ली इस लिस्ट में नवें नंबर पर है। देश के तेरह राज्यों में उत्तर प्रदेश इस लिहाज से सबसे ज्यादा भ्रष्ट साबित हुआ जहां के लोगों को सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा।
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सर्वे के मुताबिक पूरे भारत में दिल्ली में भ्रष्टाचार नवें नंबर पर है जबकि भाजपा शासित गुजरात सबसे कम भ्रष्ट है। साल 2018 के सर्वे में शामिल लोगों में से 46 फीसदी लोगों ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अपना कोई काम करवाने के लिए किसी न किसी सरकारी अधिकारी को घूस दिया।
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सर्वे के मुताबिक साल 2015 में जब केजरीवाल ने सत्ता संभाली थी, दिल्ली के 20% लोगों ने यह स्वीकार किया था कि राजधानी में करप्शन होता है। साल 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 25 फीसदी पहुंच गया। वर्ष 2018 में 34 फीसदी लोगों ने भ्रष्टाचार में घूस देने की बात स्वीकार किया।
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सीएमएस कंपनी के मुताबिक साल 2016 में दिल्ली के सिर्फ 16 फीसदी परिवारों ने यह स्वीकार किया था कि राजधानी में भ्रष्टाचार होता है। उस समय राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 31 फीसदी था। जबकि इस वर्ष यानी 2018 में दिल्ली के 29 फीसदी परिवारों ने दिल्ली में भ्रष्टाचार होने की बात स्वीकार किया। इस लिहाज से दिल्ली में भ्रष्टाचार का स्तर राष्ट्रीय स्तर से भी दो फीसदी अधिक पाया गया है।
पूरे राष्ट्रीय स्तर पर लोगों से यह सवाल किया गया कि पिछले एक साल में उन्होंने कितनी बार सरकारी अधिकारियों को घूस दिया? इस सवाल के जवाब में गुजरात के लोगों ने सबसे कम बार घूस देने की बात स्वीकार किया। जबकि राजधानी दिल्ली इस लिस्ट में नवें नंबर पर है। देश के तेरह राज्यों में उत्तर प्रदेश इस लिहाज से सबसे ज्यादा भ्रष्ट साबित हुआ जहां के लोगों को सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा।
पाया गया है कि स्थानीय लोगों को पुलिस और ट्रैफिक पुलिस को सबसे ज्यादा घूस देना पड़ता है। लेकिन इस मामले में दिल्ली के लोगों को कुछ 'राहत' मिल गई लगती है क्योंकि इस बार सर्वें में लोगों ने माना है कि साल 2016 के 23 फीसदी के मुकाबले इस साल सिर्फ 13 फीसदी लोगों को पुलिस को घूस देना पड़ा है।
दिल्ली की भाजपा शासित एमसीडी में भी भ्रष्टाचार 2016 के 37 फीसदी के मुकाबले साल 2018 में कम यानी 23 फीसदी हुआ है। वहीं लोगों ने दिल्ली सरकार की सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात स्वीकार किया है। इन सेवाओं में साल 2016 में 40 फीसदी के मुकाबले साल 2018 में 64 फीसदी लोगों ने घूस देने की बात स्वीकार किया है।
कांग्रेस ने कहा, खुल गई कलई
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन से लोगों को ईमानदार छवि दिखाकर सत्ता में आए अरविंद केजरीवाल की कलई खुल गई है। जिन सेवाओं पर केवल दिल्ली सरकार का अधिकार है, और उनमें केंद्र या एलजी के हस्तक्षेप की बात नहींं कही जा सकती, उनमें भी भ्रष्टाचार का स्तर बढ़ा है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार से जनता का मोहभंग हो गया है।
दिल्ली प्रदेश के मीडिया इंचार्ज माजिद अहमद ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सत्ता पाने के एक महीने के भीतर लोकपाल गठित करने का वायदा किया था। लेकिन आज तक उन्होंने गठन नहीं किया। इसी से साबित होता है कि भ्रष्टाचार के प्रति उनकी ईमानदारी कितनी सच्ची थी। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास केजरीवाल सरकार से उठ चुका है।
दिल्ली की भाजपा शासित एमसीडी में भी भ्रष्टाचार 2016 के 37 फीसदी के मुकाबले साल 2018 में कम यानी 23 फीसदी हुआ है। वहीं लोगों ने दिल्ली सरकार की सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात स्वीकार किया है। इन सेवाओं में साल 2016 में 40 फीसदी के मुकाबले साल 2018 में 64 फीसदी लोगों ने घूस देने की बात स्वीकार किया है।
कांग्रेस ने कहा, खुल गई कलई
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन से लोगों को ईमानदार छवि दिखाकर सत्ता में आए अरविंद केजरीवाल की कलई खुल गई है। जिन सेवाओं पर केवल दिल्ली सरकार का अधिकार है, और उनमें केंद्र या एलजी के हस्तक्षेप की बात नहींं कही जा सकती, उनमें भी भ्रष्टाचार का स्तर बढ़ा है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार से जनता का मोहभंग हो गया है।
दिल्ली प्रदेश के मीडिया इंचार्ज माजिद अहमद ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सत्ता पाने के एक महीने के भीतर लोकपाल गठित करने का वायदा किया था। लेकिन आज तक उन्होंने गठन नहीं किया। इसी से साबित होता है कि भ्रष्टाचार के प्रति उनकी ईमानदारी कितनी सच्ची थी। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास केजरीवाल सरकार से उठ चुका है।