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निगम को नहीं पता कितने हैं धुलाई सेंटर, धारा 144 के बावजूद भी पानी का दुरुपयोग
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 16 May 2016 09:27 AM IST
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शहर में हो रही पानी की बर्बादी
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प्रदेश में पानी के गंभीर संकट को देखते हुए सरकार ने फरीदाबाद समेत सभी जिलों में धारा-144 लागू कर पानी की बर्बादी को अपराध घोषित कर रखा है। शहरी स्थानीय निकाय ने पत्र जारी कर 30 जून तक पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निकायों को आदेश दिया है।
बावजूद यहां नगर निगम सीमाक्षेत्र में अवैध तरीके से चल रहे धुलाई सेंटरों में पानी की खूब बर्बादी हो रही है, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं है। आपको जानकर हैरानी होगी कि नगर निगम को पता ही नहीं है कि तीनों जोन में कितने धुलाई सेंटर चल रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम पानी की बर्बादी रोकने के लिए कितना गंभीर है।
जानकारों के मुताबिक, एनआईटी, ओल्ड और बल्लभगढ़ जोन में 1400 से अधिक धुलाई सेंटर हैं। यहां बाइक से लेकर बड़ी गाड़ियों तक की धुलाई होती है। एक अनुमान के मुताबिक, एक सेंटर पर दिनभर में लगभग 80 गाड़ियों की धुलाई की जाती है। इन सेंटरों पर बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी धड़ल्ले से हो रही है, लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं है।
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घरेलू कनेक्शन लेकर कर रहे व्यवसायिक उपयोग
निगम सूत्रों की मानें तो धुलाई सेंटर संचालकों ने घरेलू पानी कनेक्शन ले रखा है, लेकिन उसकी आड़ में इस कनेक्शन से व्यवसाय कर रहे हैं। गाड़ियों की धुलाई के बदले पैसे कमाए जा रहे हैं।
यह धंधा पूरे शहर के अलग-अलग हिस्सों में धड़ल्ले से चल रहा है। धुलाई सेंटर संचालकों ने बाइक की धुलाई का 50 रुपये और कारों की धुलाई का अलग-अलग रेट तय कर रखा है। छोटी कार की धुलाई 120 रुपये से लेकर 250 रुपये तक फिक्स है।
करोड़ों की कमाई, निगम को फूटी कौड़ी भी नहीं
शहर में धुलाई सेंटर एक मुनाफे का सौदा है। धुलाई सेंटर संचालक एक दिन में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं और निगम को फूटी कौड़ी भी नहीं मिल रही है।
जानकारों का कहना है कि करीब 1400 धुलाई सेंटरों पर एक सेंटर पर ऑन एवरेज 80 गाड़ियों की धुलाई की जाती है। ऐसे में एक दिन में 1,12,000 गाड़ियों की धुलाई हो रही है। इतनी गाड़ियों की धुलाई के बदले यदि एक गाड़ी से 150 रुपये भी लिए जा रहे हैं, तो एक दिन में 1,68,00000 रुपया धुलाई सेंटरों की जेब में जा रहा है।
सरकार के आदेश की नहीं है परवाह
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पानी की बढ़ती मांग के मद्देनजर 5 मई से 30 जून तक घास के प्रांगण, बगीचे और वाहनों की धुलाई पर पाबंदी लगा दी है, जिसमें कहा गया है कि जो भी इस आदेश का पालन नहीं करेगा, जलापूर्ति नियमों के प्रावधानों के अनुसार उसका पानी का कनेक्शन काटा जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
बावजूद शहर में धड़ल्ले से वाहनों की धुलाई भी हो रही है और बगीचों की सिंचाई भी की जा रही है। जिन निगम अधिकारियों को इस आदेश का पालन कराना है वह नींद में सो रहे हैं। ऐसे में पानी का दुरुपयोग कैसे रुकेगा।
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बावजूद यहां नगर निगम सीमाक्षेत्र में अवैध तरीके से चल रहे धुलाई सेंटरों में पानी की खूब बर्बादी हो रही है, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं है। आपको जानकर हैरानी होगी कि नगर निगम को पता ही नहीं है कि तीनों जोन में कितने धुलाई सेंटर चल रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम पानी की बर्बादी रोकने के लिए कितना गंभीर है।
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जानकारों के मुताबिक, एनआईटी, ओल्ड और बल्लभगढ़ जोन में 1400 से अधिक धुलाई सेंटर हैं। यहां बाइक से लेकर बड़ी गाड़ियों तक की धुलाई होती है। एक अनुमान के मुताबिक, एक सेंटर पर दिनभर में लगभग 80 गाड़ियों की धुलाई की जाती है। इन सेंटरों पर बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी धड़ल्ले से हो रही है, लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं है।
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घरेलू कनेक्शन लेकर कर रहे व्यवसायिक उपयोग
निगम सूत्रों की मानें तो धुलाई सेंटर संचालकों ने घरेलू पानी कनेक्शन ले रखा है, लेकिन उसकी आड़ में इस कनेक्शन से व्यवसाय कर रहे हैं। गाड़ियों की धुलाई के बदले पैसे कमाए जा रहे हैं।
यह धंधा पूरे शहर के अलग-अलग हिस्सों में धड़ल्ले से चल रहा है। धुलाई सेंटर संचालकों ने बाइक की धुलाई का 50 रुपये और कारों की धुलाई का अलग-अलग रेट तय कर रखा है। छोटी कार की धुलाई 120 रुपये से लेकर 250 रुपये तक फिक्स है।
करोड़ों की कमाई, निगम को फूटी कौड़ी भी नहीं
शहर में धुलाई सेंटर एक मुनाफे का सौदा है। धुलाई सेंटर संचालक एक दिन में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं और निगम को फूटी कौड़ी भी नहीं मिल रही है।
जानकारों का कहना है कि करीब 1400 धुलाई सेंटरों पर एक सेंटर पर ऑन एवरेज 80 गाड़ियों की धुलाई की जाती है। ऐसे में एक दिन में 1,12,000 गाड़ियों की धुलाई हो रही है। इतनी गाड़ियों की धुलाई के बदले यदि एक गाड़ी से 150 रुपये भी लिए जा रहे हैं, तो एक दिन में 1,68,00000 रुपया धुलाई सेंटरों की जेब में जा रहा है।
सरकार के आदेश की नहीं है परवाह
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पानी की बढ़ती मांग के मद्देनजर 5 मई से 30 जून तक घास के प्रांगण, बगीचे और वाहनों की धुलाई पर पाबंदी लगा दी है, जिसमें कहा गया है कि जो भी इस आदेश का पालन नहीं करेगा, जलापूर्ति नियमों के प्रावधानों के अनुसार उसका पानी का कनेक्शन काटा जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
बावजूद शहर में धड़ल्ले से वाहनों की धुलाई भी हो रही है और बगीचों की सिंचाई भी की जा रही है। जिन निगम अधिकारियों को इस आदेश का पालन कराना है वह नींद में सो रहे हैं। ऐसे में पानी का दुरुपयोग कैसे रुकेगा।