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कोरोना मरीजों की निकालनी पड़ रही आंखें और जबड़ा, 15 दिन के भीतर 13 मरीज आए सामने, पांच की हुई मौत

Mon, 14 Dec 2020 08:18 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 14 Dec 2020 08:18 PM IST
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coronavirus new infection spreding in recovered pateints, mukar allergy
कोरोना वायरस के मरीजों को हो रहा नया इंफेक्शन - फोटो : अमर उजाला

यूं तो देश में कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद स्वस्थ्य होने वालों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है लेकिन कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें संक्रमण के अतिगंभीर मामले देखने को मिल रहे हैं। ऐसे ही मामलों में कोरोना मरीजों की आंखें और जबड़ा तक निकालना पड़ रहा है।

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दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पिछले 15 दिन के भीतर 13 ऐसे संक्रमित मरीज मिले हैं जिन्हें तत्काल ऑपरेशन करके संक्रमण प्रभावित अंग को निकालना पड़ गया। इस दौरान पांच लोगों की मौत भी अस्पताल में हुई। 
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डॉक्टरों के अनुसार कुछ मरीजों में कोरोना वायरस की वजह से एक प्रकार की एलर्जी देखने को मिल रही है जोकि नाक और मुंह के जरिए आंखों तक पहुंचती है। इसके बाद यह सीधे दिमाग की ओर बढ़ने लगती है।
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गौर करने वाली बात है कि शरीर के जिस जिस अंग से होते हुए यह एलर्जी बढ़ती है वह अंग पूरी तरह से खत्म हो जाता है और डॉक्टरों के पास उसे बाहर निकालने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। अगर यह एलर्जी आंखों से होते हुए दिमाग तक पहुंच जाती है तो ऐसे मामलों में मृत्यु की आशंका 100 फीसदी है। 

coronavirus new infection spreding in recovered pateints, mukar allergy
कोरोना वायरस के मरीजों को हो रहा नया इंफेक्शन - फोटो : अमर उजाला

अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. मनीष मंजुल का कहना है कि संक्रमित होने के बाद सबसे पहले नाक बंद होती है और उसके बाद गाल व जबड़े पर सूजन आती है। इसके बाद आंखों से दिखाई देना बंद होने लगता है। यह पूरी प्रक्रिया महज चार से पांच दिन में हो रही है।

नाक और जबड़े तक समस्या आने पर मरीज ध्यान नहीं दे रहा लेकिन जब उसे आंखों से दिखना बंद होने लगता है तो उसे पास अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। अस्पताल में आए सभी 13 मामलों में यह समस्या देखने को मिली। डॉ. मंजुल का कहना है कि एलर्जी इतनी तेजी से बढ़ती है कि वह कुछ भी उपचार का इंतजार नहीं करती और अंग खत्म होने लगते हैं। अभी तक कोरोना वायरस के ऐसे दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं। 

पश्चिमी दिल्ली के ही निवासी 32 वर्षीय राजेश को 20 नवंबर से बुखार की शिकायत थी। घर में बुजुर्ग सदस्यों की वजह से उन्होंने अपनी जांच कराई तो वह कोरोना संक्रमित मिले। मधुमेह होने के चलते चार दिन बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगी। इसके चलते उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जहां से सात दिन बाद वह डिस्चॉर्ज भी हो गए लेकिन घर आने के दो दिन बाद आंखों के आसपास सूजन दिखाई देने लगी।

उन्होंने दोबारा डॉक्टरों ने जानकारी ली तो उन्हें पेनकिलर दे दी गईं लेकिन कुछ ही समय बाद मरीज को आपातकालीन स्थिति में भर्ती करना पड़ा। जांच में पता चला कि उन्हें म्युकर नामक एजर्ली हुई जिसकी पहचान नाक से सैंपल लेने पर हुई। एमआरआई से पता चला कि उनकी आंख, जबड़ा और चेहरे की मांसपेशियां तक खत्म हो चुकी थीं और एलर्जी दिमाग की ओर बढ़ रही थी। इसके बाद उनका ऑपरेशन किया गया है। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 

डॉ. मंजुल ने बताया कि उनके यहां पिछले कुछ ही दिन में 10 मरीज ऐसे भी आएं हैं जोकि अपनी आंखों की 50 फीसदी रोशनी खो चुके हैं। यह रोशनी वापस नहीं आ सकती है। इनमें से पांच मरीज अभी अति गंभीर स्थिति में हैं। वहीं डॉ. वरुण राय ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों में किसी भी प्रकार की सूजन एक तरह का संकेत हो सकता है। अगर इस तरह का कोई लक्षण मिलता है तो उसका जितना जल्दी हो सके, उपचार लेना जरूरी है। 
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