दिल्ली में को'रोना': डरा रहे हैं मौत के आंकड़े, पिछले एक हफ्ते की कहानी पैदा करती है खौफ
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विस्तार
दिल्ली में बीते 10 महीनों में जब से कोरोना का पहला केस आया है तब से लेकर अब तक इस महामारी की तीन लहरें आ चुकी हैं। लेकिन वर्तमान में चल रही कोरोना की तीसरी लहर दिल्लीवासियों के लिए घातक बन गई है। क्योंकि यही वह दौर है जब दिल्ली में कोरोना से अधिकतम मौतें हो रही हैं। 18 नवंबर को दिल्ली में सबसे ज्यादा 131 मौतें दर्ज हुईं जो कोरोना के कारण हुईं थीं।। उसके बाद भी यह आंकड़ा कुछ सुधरा नहीं है और बीते एक सप्ताह में दिल्ली में रोजाना 100 से अधिक कोरोना संक्रमितों की मौत हो रही हैं।
भले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री से लेकर अन्य मंत्री यह दावा कर रहे हों कि दिल्ली में मृत्युदर पूरे देश के मुकाबले सबसे कम है और यहां अस्पताल का प्रबंधन भी सुचारु रूप से चल रहा है, लेकिन अगर बात सिर्फ बीते 15 दिनों की करें तो सभी सरकारी दावे गलत नजर आते हैं।
दिल्ली सरकार का दावा है कि कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 15 शहरों में उनका आंकड़ा सबसे बेहतर है और मृत्यु दर भी सबसे कम है। लेकिन इसके पीछे वजह ये है कि सरकार ऐतिहासिक मृत्यु दर की बात कर रही है, यानी 2 मार्च से लेकर अब तक आंकड़ों की। इसके हिसाब से दिल्ली की मृत्यु दर 1.6 प्रतिशत है। वहीं अगर सिर्फ बीते आठ-दस दिनों की बात करें तो दिल्ली की मृत्युदर 1.86 प्रतिशत है जो इस समय में देश के किसी भी राज्य की मृत्युदर से सबसे ज्यादा है।
दिल्ली में मौतें क्यों बढ़ रही हैं...
अब सवाल उठता है कि दिल्ली में मृत्यु दर क्यों बढ़ रही है। पिछले दो पीक में जहां दिल्ली में एक दिन में मौतों का आंकड़ा 50 के पार मुश्किल से गया वहीं तीसरे पीक में इतनी ज्यादा मौतें क्यों हो रही हैं। इसकी कई वजह हैं जो निम्नलिखित हैं....
1- अस्पतालों में बेड की कमी- अस्पतालों में बेड की कमी होने से गंभीर मरीज का सही से इलाज नहीं हो पा रहा। उचित इलाज और देखभाल की कमी की वजह से गंभीर मरीज ज्यादा संख्या में दम तोड़ रहे हैं जिससे दिल्ली की मृत्यु दर में इजाफा हो रहा है। सरकारी तंत्र कुछ भी दावा करे लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि गंभीर मरीजों को बेड की कमी से दो चार होना पड़ रहा है जिसके चलते उनकी जान जा रही है।
2- मरीज को समय से इलाज न मिलना- अस्पतालों में आईसीयू बेड या अन्य बेड की कमी की वजह से सही से इलाज नहीं मिल रहा। उदाहरण के लिए कोई गंभीर मरीज एक अस्पताल में गया लेकिन उसे वहां बेड नहीं मिला। अगर इसी हालत में दो-तीन अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर हो और काफी बाद में उसे इलाज मिले तो उसके इलाज का सही वक्त निकल जाता है। ऐसे में समय से इलाज न मिलने या फिर इलाज मिले ही नहीं तो उसकी स्थिति और गंभीर होती जाती है, जिससे उसकी मौत हो जाती है।
72 घंटे के अंदर हो रहीं मौतें
इसी देरी की वजह से अस्पातालों का डाटा ये कहता है कि 72 घंटे के अंदर ज्यादातर मरीजों की मौत हो रही है। यानी बीते आठ से दस दिनों में रोजाना 60 प्रतिशत जो मौतें हो रही हैं वह मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के 72 घंटे के अंदर हो रही हैं। जिसका सीधा मतलब ये है कि अगर कोई मरीज आज भर्ती होता है तो तीन दिन बाद उसकी मौत हो जा रही है। इस 60 प्रतिशत में भी 25 प्रतिशत मौतें ऐसी हैं जो अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर ही हुई हैं। यह डाटा साफ-साफ इशारा करता है कि डॉक्टर अपने मरीज को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे जिससे उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पा रहा।
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क्यों हो रही है अस्पताल पहुंचने में देरी
बड़ा सवाल ये उठता है कि लोग सही समय पर अस्पताल क्यों नहीं पहुंच रहे हैं। इसकी वजह ये है कि जैसे ही किसी को पता चलता है कि वह पॉजिटिव है लेकिन उसमें लक्षण नहीं होते तो वह अपने आपको घर में आइसोलेट कर ले रहा है। लेकिन इसके बाद वह कोई डॉक्टरी परामर्श नहीं ले रहा है। वह इंटरनेट, सोशल मीडिया या अपने रिश्तेदारों की परामर्श पर चल रहा है। शुरू में तो ऐसा मरीज ठीक रहता है लेकिन पांच-छह दिन में जब उसकी हालत अचानक से गंभीर होती है तो वह अस्पताल भागता है और अस्पतालों में बेड की कमी के चलते उसे इलाज नहीं मिलता और उसकी मौत हो जाती है।
3- प्रदूषण भी ले रहा कोरोना मरीजों की जान- दिल्ली में इन दिनों प्रदूषण भी बहुत बढ़ा हुआ है। इस प्रदूषण के चलते सामान्य मरीज तो कोरोना से ठीक हो जाता है। लेकिन वो कोरोना संक्रमित जिसे सांस की कोई बीमारी पहले से है, जैसे- किसी को अस्थमा या काला दमा है तो उसके बचने की संभावना न के बराबर हो जाती है।
4- दवाइयों का भी पड़ रहा बुरा प्रभाव- जब किसी शख्स को कोरोना बीमारी होती है और वह डॉक्टर के पास जाता है तो वह उसे कोरोना के लिए इलाज में लाई जा रही दवा लिख देता है। हालांकि हर शख्स का शरीर और दवाइयों की उसकी स्वीकार्यता अलग-अलग होती है। डॉक्टर ये नहीं जानते कि कोरोना की दवाओं का किस व्यक्ति पर कैसा असर पड़ेगा। किसी-किसी को वह दवा नुकसान भी कर रही है। इसी के चलते कुछ ऐसे केस भी रिपोर्ट हुए हैं जिसमें दवा की वजह से मरीज को हार्ट अटैक आया है जिससे उसकी मौत हो गई।
बीते एक सप्ताह में मौतों का आंकड़ा-
24 नवंबर- 109 मौतें
23 नवंबर- 121 मौतें
22 नवंबर- 121 मौतें
21 नवंबर- 111 मौतें
20 नवंबर- 118 मौतें
19 नवंबर- 98 मौतें
18 नवंबर- 131 मौतें