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एलएनजेपी अस्पताल में चार मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का परीक्षण अबतक रहा सफल: केजरीवाल

Fri, 24 Apr 2020 04:49 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 24 Apr 2020 04:49 PM IST
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Coronavirus Plasma Therapy: Delhi CM Arvind Kejriwal Coronavirus Delhi CM arvind kejriwal press conference on plazma therapy know everything about it
प्लाज्मा थेरेपी पर जानकारी देते अरविंद केजरीवाल - फोटो : ANI

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना के चार मरीजों पर हुए प्लाज्मा थेरेपी को लेकर प्रेस वार्ता की। इसमें उन्होंने बताया कि एलएनजेपी में चार मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी की गई जो काफी हद तक सफल रही। इन पर मंगलवार को थेरेपी की गई थी।

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केजरीवाल ने कहा, हमने एलएनजेपी अस्पताल के 4 मरीजों पर प्लाज्मा का ट्रायल करके देखा, उसके अब तक के नतीजे उत्साहवर्धक हैं। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों से इसके लिए रक्तदान करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने से आप कई लोगों की जान बचा सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि करीब दस दिन पहले हमें केंद्र सरकार से अनुमति मिली थी कि हम एलएनजेपी अस्पताल के सबसे गंभीर मरीजों पर इसका ट्रायल कर सकते हैं। उन्होंने प्लाज्मा थेरेपी के बारे में बताते हुए कहा कि जो कोरोना के मरीज ठीक होकर घर चले जाते हैं, उनका प्लाज्मा निकालकर हम जो संक्रमित मरीज हैं उनमें डालते हैं, तो वो ठीक हो सकते हैं।

हमने इस थेरेपी का इस्तेमाल एलएनजेपी के चार गंभीर रूप से कोरोना पीड़ितों पर किया था। उन्होंने कहा कि परिणाम काफी उत्साहवर्धक हैं। मुख्यमंत्री ने इसके बाद आईएलबीएस अस्पताल के डॉक्टर सरीन को पूरी बात समझाने के लिए आमंत्रित किया।


डॉक्टर एसके सरीन ही इस पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर कर रहे थे। डॉक्टर सरीन ने बताया कि यह एक पुरानी थेरेपी है क्योंकि हमारे पास इसका कोई इलाज या वैक्सीन नहीं है इसलिए हमने इस थेरेपी को कोरोना के संक्रमण को न्यूट्रलाइज करने के लिए इस्तेमाल किया।

डॉ. सरीन ने क्या-क्या कहा 

  • पहला- वायरस फेज, जब वायरस शरीर में घुसता है
  • दूसरा- पल्मोनरी फेज जिसमें वायरस फेफड़ों पर अटैक करता है और श्वसन संबंधी परेशानी होने लगती है।
  • तीसरा- साइटोकाइन रीलिज होते हैं, जिसमें शरीर वायरस से लड़ता है और उसे मार सकता है।


डॉ. सरीन ने कहा कि अगर तीसरे फेज में मरीज अस्पताल आता है तो उस वक्त उसका ऑर्गन फेल हो सकता है जिससे उसकी मौत हो सकती है। अगर मरीज दूसरे फेज में अस्पताल आता है जब उसका फेफड़ा संक्रमित होता है लेकिन बाकी ऑर्गन काम कर रहे होते हैं। उस स्टेज में अगर हम प्लाज्मा थेरेपी दें तो मरीज को ठीक किया जा सकता है क्योंकि पहले स्टेज में तो बीमारी पकड़ में ही नहीं आती।

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