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कोरोना योद्धा : मजदूरों के साथ मिलकर रोजाना 6 हजार टन खाद्यान्न का उत्पादन कर रहे व्यवसायी
Fri, 10 Apr 2020 08:57 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 10 Apr 2020 08:57 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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लॉकडाउन के दौरान लोगों को खाने पीने की कमी न हो इसलिए नरेला औद्योगिक क्षेत्र की लगभग 60 खाद्यान्न फैक्ट्रियां निर्बाध तरीके से काम कर रही हैं। इनमें मजदूरों की संख्या कम होने के बावजूद व्यवसायी अपने बच्चों के साथ रुककर खुद काम कर रहे हैं। इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन लगभग छह हजार टन (60 लाख किलो ग्राम) आटा, दाल और बेसन का उत्पादन किया जा रहा है।
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लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में मजदूरों के फैक्ट्रियां छोड़कर जाने के बावजूद कामगारों का मनोबल बढ़ाने के लिए फैक्टरी मालिक खुद भी श्रमदान कर रहे हैं। नरेला डीएसआईआईडीसी (दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) में खाद्यान्न उत्पादन करने वाली लगभग सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां हैं। मजदूरों के अभाव में केवल 60 इकाइयां चल रही हैं। जहां पर खास तौर से आटा, दाल और बेसन का उत्पादन होता है।
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नरेला डीएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत नरेला फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अनूप गोयल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन घट गया है। इसके बावजूद यहां रोजाना इतने खाद्यान्न उत्पादन से लगभग 2 करोड़ लोगों का पेट रोजाना भरा जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि उनकी मिल में रोजाना साढ़े पांच सौ से छह सौ टन दाल और बेसन का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में दिल्ली वासियों को खाने पीने की कमी नहीं होने पाएगी। अनूप गोयल ने बताया कि बड़ी मुश्किल से कामगारों को समझा बुझाकर रोका गया है। ऐसे में उनके खाने पीने और रहने की व्यवस्था फैक्ट्रियों में ही की गई है। फैक्ट्रियों में सैनिटाइजेशन का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। अनिवार्य सेवा में शामिल होने के नाते प्रशासन फैक्ट्रियों को चलाने में पूरा सहयोग दे रहा है।