कोरोना वायरस: बदलते मौसम में भारी पड़ सकती है हल्की सी भी लापरवाही, ऐसे करें बचाव
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कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच बदलते मौसम में हल्की सी भी लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है। ऐसे में इन दिनों खाने पीने में अधिक ध्यान बरतने की आवश्यकता है। वहीं, आयुर्वेद को अपनाकर भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कोरोना से जंग जीती जा सकती है।
प्रशांत विहार स्थित उत्तरी निगम के पंचकर्मा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर आरपी पाराशर ने बताया कि इन दिनों मौसम में बदलाव हो रहा है। ऐसे में खाने पीने पर ध्यान देने के साथ आयुर्वेद की जड़ी बूटियों से भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
यदि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद भी संक्रमण उत्पन्न नहीं कर सकेगा। यह वायरस बच्चों और बूढ़ों व ऐसे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उन्हीं को अपनी गिरफ्त में लेता है।
उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव होने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी बदलाव होता है। ऐसे में कई बार बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि इन दिनों तापमान में बार-बार बदलाव होता है। इसलिए जरूरी है कि इन दिनों ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन ना किया जाए। इसमें दही, चावल और ठंडे पानी का विशेष रूप से परहेज करना चाहिए।
दूध व चाय में तुलसी अदरक लौंग अधिक डालकर पीएं
डॉक्टर ने बताया कि इन दोनों दूध, चाय अथवा पानी को उबाल कर उसमें अदरक, तुलसी, काली मिर्च, लौंग वसाका, गिलोय और छोटी पीपली को डालकर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पीपली की गोली त्रिकुट के नाम से बाजार में आसानी से मिल जाती है।
वहीं, रात में दूध में हल्दी, मुनक्का, खजूर और अश्वगंधा डालकर पीने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। विशेष तौर पर बच्चे और बुजुर्गों को इसका सेवन करना चाहिए।
चिकित्सक की सलाह से लें आयुर्वेदिक दवाएं
डॉक्टर ने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई लोग आयुर्वेदिक दवाइयां भी लेते हैं। ऐसे में चिकित्सक की सलाह के बिना आयुर्वेदिक दवा ना लें। सितोपलादि चूर्ण, लक्ष्मी विलास रस, चंद्र अमृत, वासावलेह, टंकण भस्म, कंटकारी, अवलेह व अगस्त्य हरीतकी आदि का सेवन आवश्यक रूप से चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
सकारात्मक उर्जा के प्रभाव से भी मजबूत होता है रोग प्रतिरोधक तंत्र
दिन में अधिक से अधिक सकारात्मक रहें। इसके लिए म्यूजिक थेरेपी व लाफ्टर थेरेपी समेत सात्विक भोजन और सकारात्मक व्यक्तियों के संग बातचीत कर सकते हैं। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने से दिमाग में सेराटोनिन हार्मोन का स्राव होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है।