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कोरोना से बेहाल दिल्ली-एनसीआर, इन कहानियों से पसीज जाएगा दिल

Sat, 13 Jun 2020 06:14 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 13 Jun 2020 06:14 PM IST
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Corona crisis in Delhi ncr these stories will melt your heart
कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

दिल्ली-एनसीआर में रोजाना कोरोना संक्रमण की गति तेज होती जा रही है। एक ओर तो कोरोना ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है दूसरी तरफ सरकारों, अस्पतालों के नियम व लचर रवैये ने लोगों को मजबूर कर रखा है। आम लोगों की बात क्या कहें यहां दिल्ली पुलिस के एएसआई के परिवार तक को उनका शव पाने के लिए सिस्टम से लड़ाई लड़नी पड़ी। पढ़िए ऐसी ही कुछ दर्दनाक कहानियां....

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दिल्ली पुलिस के एएसआई की मौत के बाद सात दिन मोर्चरी में पड़ा रहा शव
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में तैनात एक एएसआई की शुक्रवार को कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई। वह जीटीबी अस्पताल में भर्ती थे। फिलहाल वह उत्तर-पूर्वी जिले में हुए दंगों और तब्लीगी मरकज मामले की जांच में लगे हुए थे। बताया जा रहा है कि उनकी यूनिट के एक इंस्पेक्टर की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। अब तक दिल्ली पुलिस के आठ जवानों की मौत हो चुकी है। दुखद बात ये है कि कोरोना से जंग हारे एसआई रामलाल का शव सात दिन मोर्चरी में रखा रहा। उनके परिजनों को पहले कोरोना टेस्ट कराने और फिर शव लेने के लिए सिस्टम से लड़ाई लड़नी पड़ी।
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छह माह के बेटे के ऑपेरशन को दिल्ली-मेरठ के अस्पतालों में भटक रही मां
कोरोना संक्रमण काल में आम मरीजों को भी इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। लोनी में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां छह माह के बच्चे का ट्यूमर का आपरेशन नहीं हो पा रहा है। परिजन दिल्ली के अस्पतालों से लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज तक चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन कहीं से भी उन्हें आशा की किरण दिखाई नहीं दे रही। मेरठ मेडिकल कॉलेज में तो भर्ती करने के बाद दूसरे दिन ऑपरेशन से मना कर दिया गया। 
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लोनी की इंदिरापुरी में रहने वाली नाजिमा अपने छह महीने के बेटे को लेकर दिल्ली से मेरठ तक अस्पतालों में इधर से उधर भटक रही हैं। बच्चे के कमर पर जन्म से ही एक ट्यूमर है, जो धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। अब वह बच्चे के सिर के बराबर हो चुका है। दिल्ली के कई अस्पतालों से नाउम्मीद हो चुकी नाजिमा 9 जून को बच्चे को लेकर जिला एमएमजी अस्पताल पहुंची थी। जहां से उन्हें मेरठ रेफर कर दिया गया। देर शाम बच्चे को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती भी कर लिया गया। नाजिमा का कहना है कि दो दिन तक अस्पताल का स्टाफ उन्हें बच्चे के ऑपरेशन का आश्वासन देता रहा लेकिन अब डॉक्टर ऑपरेशन नहीं करने की बात कह रहे हैं। नाजिमा ने बताया कि डॉक्टर कह रहे हैं कि कोरोना के कारण अस्पताल में ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। मेरठ के अस्पताल से बच्चे को घर ले जाने को कहा जा रहा है।

पति को कोरोना, दो दिन बाद भी पत्नी-बेटी का टेस्ट नहीं

ग्रेटर नोएडा में पति जिम्स के आइसोलेशन वार्ड में कोरोना से लड़ रहा है। पत्नी दो दिन से स्वास्थ्य विभाग से टेस्ट कराने की गुहार लगा रही है। कई बार फोन करने के बाद भी महिला और बेटी को न क्वारंटीन किया गया न ही टेस्ट कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के रवैये से दुखी महिला ने अब निजी अस्पताल से टेस्ट कराकर घर में क्वारंटीन रहने की ठानी है। ग्रेटर नोएडा की जीटा-1 स्थित एवीजे सोसाइटी निवासी एक व्यक्ति दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं। वह प्रतिदिन ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाते थे। पिछले एक सप्ताह से उन्हें बुखार था। एक डॉक्टर से परामर्श लिया और एक निजी लैब से कोरोना संक्रमण की जांच कराई।

मंगलवार को पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें जिम्स में भर्ती कराया गया। महिला ने बताया कि पति के संक्रमित होने पर कई बार स्वास्थ्य विभाग के नंबरों पर कॉल कर क्वारंटीन और टेस्ट कराने की गुहार लगाई। महिला का कहना है कि ब्लॉक और सोसाइटी ग्रुप पर भी सूचना दी। सोसाइटी के लोगों ने भी कई बार स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसका कहना है कि जब से उसके पति की तबियत खराब हुई तभी से वह भी ग्रेटर नोएडा स्थित अपने इंश्योरेंस दफ्तर नहीं गई। उन्होंने बताया कि बेटी के साथ फ्लैट में खुद को क्वारंटीन कर रखा है। वहीं, महिला ने बताया कि प्रशासन की ओर से सोसाइटी और उनके ब्लॉक को भी सैनिटाइज नहीं किया गया है।

गाजियाबाद स्थित लोनी के अशोक विहार निवासी हमीद खां की कहानी भी बड़ी दर्दनाक है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को उनकी 22 साल की बेटी अफसान को बुखार था। वह उसे जीटीबी अस्पताल लाए, वहीं रात आठ बजे उसकी मौत हो गई। हमीद बेटी के शव के लिए रात तीन बजे तक शव लेने के लिए इंतजार करते रहे। फिर उन्हें कहा गया सुबह 9 बजे आना। सुबह उनसे बेटी का आधार कार्ड मांगा जाने लगा जो उनके पास नहीं था। शव भी मिल जाए तो हमीद कहते हैं कि उन्हें कब्रिस्तान ने शव दफनाने से मना कर दिया है। अब वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर वह क्या करें।

मरने वालों के कीमती चीजें हो रहीं गायब
दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल से लेकर तमाम अस्पताल से यह खबर आ रही है कि जिन लोगों की कोरोना से मौत हो रही है उनमें से कई लोगों के मोबाइल समेत तमाम कीमती चीजें गायब हो रही हैं। 

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