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Delhi NCR News: अंबेडकर विश्वविद्यालय में 11 छात्रों के निलंबन पर विवाद
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: आइसा ने जांच प्रक्रिया को बताया दिखावा, निलंबन वापस लेने और परिसर से पुलिस हटाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अंबेडकर विश्वविद्यालय में 11 छात्रों के निलंबन को लेकर विवाद गहरा गया है। छात्र संगठन आइसा ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को दिखावा बताया है। छात्रों ने निलंबन वापस लेने और परिसर से पुलिस हटाने की मांग की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित अनुशासनहीनता और तोड़फोड़ के मामले में 14 अक्तूबर की रात 11 छात्रों को निलंबित कर दिया था। इन छात्रों को सोमवार को प्रोक्टोरियल समिति के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया। आइसा का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों पर झूठे आरोप लगा रहा है और उन्हें अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं दे रहा है।
छात्रों पर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षाकर्मियों व प्रशासनिक अधिकारियों से हाथापाई के आरोप लगाए गए हैं। आइसा के अनुसार, समिति ने बार-बार मांग के बावजूद सीसीटीवी फुटेज या आरोपों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया।
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जांच प्रक्रिया पर सवाल
आइसा के मुताबिक, एमए लिटरली आर्ट के छात्र और काउंसलर शुभम को 14 अक्तूबर के बाद से परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। उन्हें सोमवार सुबह 10 बजे निलंबन पत्र मिला। उसी दिन सुबह 11:30 बजे जांच समिति के सामने पेश होने को कहा गया। छात्रों का आरोप है कि इतनी कम अवधि के नोटिस से निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती।
निलंबन और पुलिस कार्रवाई
संगठन के अनुसार, 14 अक्तूबर को रात 8 बजे छात्रों को बिना कारण बताओ नोटिस दिए निलंबित कर दिया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। इसके बाद पुलिस ने छात्रों को जबरन परिसर से बाहर निकाला। उनके विरोध प्रदर्शन की सामग्री भी हटा दी गई। संगठन ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर सत्यकेतु संस्कृत और सुरक्षा अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार समेत संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अंबेडकर विश्वविद्यालय में 11 छात्रों के निलंबन को लेकर विवाद गहरा गया है। छात्र संगठन आइसा ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को दिखावा बताया है। छात्रों ने निलंबन वापस लेने और परिसर से पुलिस हटाने की मांग की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित अनुशासनहीनता और तोड़फोड़ के मामले में 14 अक्तूबर की रात 11 छात्रों को निलंबित कर दिया था। इन छात्रों को सोमवार को प्रोक्टोरियल समिति के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया। आइसा का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों पर झूठे आरोप लगा रहा है और उन्हें अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं दे रहा है।
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छात्रों पर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षाकर्मियों व प्रशासनिक अधिकारियों से हाथापाई के आरोप लगाए गए हैं। आइसा के अनुसार, समिति ने बार-बार मांग के बावजूद सीसीटीवी फुटेज या आरोपों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया।
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जांच प्रक्रिया पर सवाल
आइसा के मुताबिक, एमए लिटरली आर्ट के छात्र और काउंसलर शुभम को 14 अक्तूबर के बाद से परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। उन्हें सोमवार सुबह 10 बजे निलंबन पत्र मिला। उसी दिन सुबह 11:30 बजे जांच समिति के सामने पेश होने को कहा गया। छात्रों का आरोप है कि इतनी कम अवधि के नोटिस से निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती।
निलंबन और पुलिस कार्रवाई
संगठन के अनुसार, 14 अक्तूबर को रात 8 बजे छात्रों को बिना कारण बताओ नोटिस दिए निलंबित कर दिया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। इसके बाद पुलिस ने छात्रों को जबरन परिसर से बाहर निकाला। उनके विरोध प्रदर्शन की सामग्री भी हटा दी गई। संगठन ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर सत्यकेतु संस्कृत और सुरक्षा अधीक्षक धर्मेंद्र कुमार समेत संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।