पानी के लिए दिल्ली होगी आत्मनिर्भर, 1000 एकड़ में जलाशयों का 25 किलोमीटर के दायरे में होगा निर्माण
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राजधानी में गंगा, यमुना समेत तमाम भूमिगत जल स्त्रोतों से 900 एमजीडी पानी की उलब्धता है। हालांकि दिल्लीवासियों की जरूरत 1125 एमजीडी की है। पानी की मांग और उपलब्धता में कमी को पूरा कर खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने पहल करने का निर्णय लिया है। इसके तहत पल्ला यमुना क्षेत्र में 1000 एकड़ के डूब क्षेत्र (फ्लड प्लेन) पर 25 किलोमीटर के दायरे में झील, तालाब सहित अन्य जलाशयों का निर्माण किया जाएगा।
बरसाती और बाढ़ के पानी का भूमिगत जलाशयों में संग्रह, बारिश के पानी का स्थानीय स्तर पर जमीन के अंदर संग्रहण, सीवर के पानी को साफ कर स्थानीय तालाबों में संग्रहित करने की योजना पर भी कार्य शुरू हो चुका है। सरकार की इस पहल से हरियाणा पर पानी की जहां निर्भरता कम होगी तो दूसरी तरफ जलाशयों और बारिश जल संचय के विकल्पों को अपनाने की अनिवार्यता से भी दिल्ली को पानी के लिहाज से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
जलाशयों का निर्माण, सीवर के साफ पानी के भंडारण और नहरों के जीर्णोद्धार की योजना है। नजफगढ़, सप्लिमेंट्री, शाहदरा और संबद्ध संपर्क नालों का जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है। भूजल में सुधार के लिए सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के वर्ष 2019-20 के बजट में 100 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ नालों के जीर्णोद्धार का नया कार्यक्रम प्रस्तावित है। तालाबों के पुनरुद्धार संरक्षण और रख रखाव की नई योजना पर 25 करोड़ रुपये के परिव्यय प्रस्तावित है। दिल्ली जल बोर्ड ने इस परियोजना के तहत 159 मौजूदा तालाबों के जीर्णोद्धार की शुरुआत कर दी है जबकि पांच नए जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है।
100 वर्ग मीटर से अधिक प्लॉटों के लिए वर्षा जल संरक्षण
भवन नियमों के प्रावधानों के मुताबिक 100 वर्ग मीटर से अधिक आकार के प्लॉटों के लिए वर्षा जल संरक्षण अनिवार्य है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिहाज से 100 वर्गमीटर से अधिक आकार के प्लॉटों के मालिकों को पानी के बिलों में 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। 500 वर्गमीटर से अधिक आकार के प्लॉट मालिकों की ओर से वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था नहीं किए जाने पर उनपर जुर्माना सहित पानी का बिल भी डेढ़ गुणा कर दिया जाएगा।
हरियाणा पर कम होगी निर्भरता
हरियाणा से दिल्ली को रोजाना करीब 150 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जाती है। मानसून के दौरान छह लाख क्यूसेक पानी दिल्ली के लिए छोड़ा जाता है। लेकिन दिल्ली के पानी के लिहाज से आत्मनिर्भर बन जाने पर पानी में अमोनिया के कारण अशुद्धता और प्रदूषण की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। द्वारका में 50 एमजीडी क्षमता का नया जल शोधन संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। इन प्रयासों से दिल्ली को करीब 246 एमजीडी अतिरिक्त पानी की उपलब्धता होगी।
345 कॉलोनियों में डाले सीवर, 13 लाख आबादी को मिलेगा फायदा
अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर की बुनियादी सुविधा को दुरस्त करने की पहल करते हुए दिल्ली सरकार ने 345 अनधिकृत कॉलोनियों में पिछले चार वर्ष में सीवर डालने का कार्य पूरा कर लिया है, जबकि 355 में अभी कार्य प्रगति पर है। इसके तहत पालम, बिजवासन, मटियाला, द्वारका, नजफगढ़, मुंडका, रिठाला और विकास पुरी विधानसभा क्षेत्र की कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसे दिसंबर 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे करीब 13 लाख की आबादी को फायदा मिलेगा।