गठबंधन की महारैली: सभी पार्टियों ने की है अपनी-अपनी तैयारी, AAP को दिख रहा अपना फायदा; बाकियों को लग रहा ये डर
इंडिया गठबंधन की महारैली दिल्ली लोकसभा चुनाव में आप व कांग्रेस के गठबंधन की नीति को तय करेगा। गठबंधन के साझा एजेंडे के लिए भी यह रैली अहम है। राजनीतिक जानकारों की माने तो मंच से वक्ताओं के भाषण से यह पता चलेगा कि बेमेल का गठबंधन है कि दोनों पार्टी एकजुटता के साथ चुनाव लड़कर भाजपा को शिकस्त देंगी।
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देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली रविवार को होनी है। इसे लेकर सभी राजनीतिक दल ने अपनी-अपनी तरह से तैयारी की है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भले ही एक मंच पर रहेंगी लेकिन दोनों के सुर-ताल अलग अलग सुनाई दे रहे हैं। अन्य पार्टियों को यह भी डर सता रहा है कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को सहानुभूति का पूरा लाभ न मिल जाए।
इसी वजह से गठबंधन के नेता कह रहे हैं कि रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली विपक्षी गठबंधन की ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ का उद्देश्य किसी व्यक्ति की रक्षा करना नहीं बल्कि संविधान और लोकतंत्र को बचाना है। वहीं आम आदमी पार्टी इस बात को मुख रख रही है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ जन आक्रोश है। इस तरह से एक दूसरे की घोर विरोधी रही दोनों पार्टियां अपनी ढपली अपना राग अलापते दिखाई पड़ रही हैं।
इंडिया गठबंधन की महारैली दिल्ली लोकसभा चुनाव में आप व कांग्रेस के गठबंधन की नीति को तय करेगा। गठबंधन के साझा एजेंडे के लिए भी यह रैली अहम है। राजनीतिक जानकारों की माने तो मंच से वक्ताओं के भाषण से यह पता चलेगा कि बेमेल का गठबंधन है कि दोनों पार्टी एकजुटता के साथ चुनाव लड़कर भाजपा को शिकस्त देंगी। रैली से दिल्ली की जनता को भी यह संदेश राजनीतिक पार्टियां देंगी।
इस रैली पर भाजपा की भी पैनी नजर है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और आप दोनों ईंडी गठबंधन की भ्रष्टाचार गाथा के एक ही पृष्ठ पर साथ खड़े हैं। रामलीला मैदान रोएगा जब आप नेताओं को कांग्रेस और अन्य ईडी गठबंधन के नेताओं के साथ खड़े देखेगा, जिन्हें उन्होंने अगस्त 2011 में इस मैदान में ही भ्रष्टाचारी कहा था।
सचदेवा ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह कहना कि ईडी गठबंधन की रैली किसी व्यक्ति का समर्थन करने के लिए नहीं है, इसके कई मायने-मतलब हैं। उनका बयान मजबूरी में किए गए गठबंधन का संकेत दे रहा है। कैलाश गहलोत तुलनात्मक रूप से चुप रहने वाले दिल्ली के मंत्री रहे हैं और शराब घोटाले में उनकी भूमिका के उजागर होने से दिल्ली वाले सदमे में है। अब सभी मानने लगे है कि पूरी सरकार और पार्टी विधायक भ्रष्टाचार में डूबे हैं। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ता के रूप में कपिल सिब्बल और शरद पवार को कोसने वाले अब उनके साथ खड़े हैं।