शीला की एंट्री की आहट, 'साइड हीरो' परेशान
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पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की वर्तमान राज्यपाल शीला दीक्षित की दिल्ली की राजनीति में एंट्री की सुगबुगाहट पर यहां के साइड हीरो परेशान होने लगे हैं।
शीला दीक्षित के समर्थक विधायक चौधरी मतीन अहमद और आसिफ मोहम्मद खान की सोनिया गांधी के पास अर्जी लगाने को कांग्रेसी दिग्गज अपनी जान बचाने से जोड़कर देख रहे हैं।
तर्क दे रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष ने टूटने को लेकर तलब किया था तो उन्होंने शीला दीक्षित की बात करके मामला टालने की कोशिश की है।
शीला के बेहद करीबी हैं ये नेता
कांग्रेस सूत्रों का कहना है शीला दीक्षित की दिल्ली वापसी से दूसरी पंक्ति के नेताओं को नुकसान होगा। मुख्यमंत्री के तौर पर खुद को प्रोजेक्ट करने वाले कई नेता हैं। शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते भी ये नेता अच्छी पोजीशन में रहे, लेकिन अब उनकी वापसी को लेकर आशंकित हैं।
उन्हें डर है कि अब पार्टी में जो पोजीशन बनी है, उसका नुकसान होगा। फिर ऐसे भी तमाम नेता हैं जो शीला दीक्षित के 15 साल के कार्यकाल में हाशिए पर रहे, उन्हें भी डर है।
विधायक चौधरी मतीन अहमद शुरुआत से ही शीला दीक्षित के करीबी रहे हैं। जबकि आसिफ मोहम्मद खान की कांग्रेस में एंट्री मुख्यमंत्री रहते शीला दीक्षित ने ही कराई।
छह विधायकों ने उठाए विरोध के सुर
कांग्रेस के आठ में से छह विधायक वर्तमान प्रदेश नेतृत्व और विधायक दल के नेता के व्यवहार को लेकर शिकायत करते रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, महिला कांग्रेस अध्यक्ष और युवक कांग्रेस अध्यक्ष से भी इस मामले में अमर उजाला ने बात की।
इन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि शीला दीक्षित की वापसी होनी चाहिए या नहीं। उन्होंने यह जरूर कहा कि जो हालात हैं, ऐसे में पार्टी को दिग्गज नेताओं की जरूरत तो है ही। उनके आने से फायदा ही होगा।
प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर लवली का बयान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने कहा कि विधायक मिलने गए थे। अपनी बात सोनिया गांधी के सामने रखकर आए हैं। इन्हें लगता है कि शीला दीक्षित को दिल्ली वापस आना चाहिए तो आएं।
हमें सिर्फ शीला दीक्षित की नहीं बल्कि कपिल सिब्बल, कृष्णा तीरथ, अजय माकन समेत तमाम दिग्गजों की जरूरत है। जो भी आएं अच्छी बात है। पार्टी को फायदा ही होगा। मैं तो सबको साथ लेकर चलने को तैयार हूं।