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कांग्रेस नेता की हत्या का खुलासा: नौ साल पहले हुई पिटाई का बदला कत्ल कर लिया, नाबालिग बेटे के साथ की वारदात

Sun, 28 Sep 2025 05:29 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 28 Sep 2025 05:29 PM IST
सार

लखपत सिंह कटारिया परिवार के साथ बेगमपुर इलाके में रहते थे। इनके परिवार में पत्नी वीरमति, बेटा शिवम व एक बेटी है। लखपत कांग्रेस से जुड़े हुए थे। उनका एरिया में प्रॉपर्टी का कारोबार था।

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Congress leader s murder case accused took revenge for beating he suffered nine years ago
Delhi Police - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में शुक्रवार सुबह प्रॉपर्टी डीलर व कांग्रेसी नेता लखपत सिंह कटारिया उर्फ लख्खी की हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड में एक व्यक्ति व उसके नाबालिग बेटे को पकड़ा है। इनकी पहचान खुशीराम (47) और इसके 17 साल के नाबालिग बेटे के रूप में हुई है।

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दरअसल, खुशीराम ने नौ साल पहले हुई पिटाई का बदला लेने के लिए योजना बनाकर लखपत सिंह कटारिया की हत्या कर दी। 9 जनवरी 2016 को एक प्लॉट बेचने को लेकर हुए विवाद में लखपत, उनके भाई धर्मेंद्र व अन्यों ने मिलकर खुशीराम की बुरी तरह पिटाई कर दी थी। हाथ-पैर टूटने की वजह से वह 9 माह बिस्तर पर रहा था।

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तभी से उसने बदला लेने की ठान ली थी। अपनी पिटाई का बदला लेने की नियत से वह शुक्रवार को पिस्टल व क्रिकेट बैट के साथ अपने नाबालिग बेटे के साथ विजय मंडल पार्क पहुंचा। आरोपियों ने पहले लखपत सिंह को बुरी तरह पीटा। बाद में चार गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी। बाद में आरोपी फरार हो गए।

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पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल बगैर नंबर प्लेट की बाइक व अन्य सामान बरामद कर लिया है। आरोपियों से पूछताछ कर वारदात में इस्तेमाल पिस्टल बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि वारदात वाले दिन खुशीराम के बेटे की उम्र को 18 साल होने में महज एक ही दिन बचा था।

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ऐसे की गई लखपत सिंह कटारिया की हत्या...
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि लखपत सिंह कटारिया परिवार के साथ बेगमपुर इलाके में रहते थे। इनके परिवार में पत्नी वीरमति, बेटा शिवम व एक बेटी है। लखपत कांग्रेस से जुड़े हुए थे। उनका एरिया में प्रॉपर्टी का कारोबार था। रोजाना सुबह के समय वह मॉर्निंग वॉक के लिए घर से विजय मंडल पार्क में जाते थे।

शुक्रवार सुबह वह पार्क में पहुंचे तो दो लोगों ने उनको घेरकर बैट से पिटाई शुरू कर दी। पार्क के गार्ड उनको बचाने आए तो आरोपियों ने उन पर पिस्टल तान दी। बाद में आरोपियों ने लखपत सिंह को चार गोली मार दी। टांग, पेट, गर्दन व सिर में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। बाद में आरोपी बाइक पर मौके से फरार हो गए।

55 किलोमीटर एरिया में लगे 650 सीसीटीवी कैमरों की मदद से हुई आरोपियों की पहचान...
लखपत सिंह की हत्या के बाद मालवीय नगर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू की। थाना प्रभारी विनय यादव, एएटीएस इचार्ज इंस्पेक्टर उमेश यादव और स्पेशल स्टाफ इंस्पेक्टर अनुराग तोमर के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन किया गया। परिजनों ने रंजिश में उनकी हत्या की आशंका जाहिर की।

पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि लखपत सिंह की अपने इलाके में कई लोगों से रंजिश चल रही थी। तीनों टीमों ने हर एक केस की बेहद बारिकी से जांच शुरू की। पार्क के गार्ड व सीसीटीवी फुटेज से यह बात पूरी तरह साफ थी कि वारदात को दो लोगों ने अंजाम दिया है। पुलिस ने सीसीटीवी की पड़ताल शुरू की।

जांच में पता चला कि आरोपी बगैर नंबर की बाइक पर हेलमेट लगाकर वहां पहुंचे थे। पुलिस ने वारदात के बाद आरोपियों के फरार होने के रूट की पड़ताल की। करीब 55 किलोमीटर में लगे 650 सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल हुई। जांच करते हुए टीम बाहरी दिल्ली औचंदी गांव पहुंच गई। वहां से खुशीराम और उसके बेटे को दबोच लिया गया।

खुशीराम के मोबाइल की सीडीआर निकलवाई गई तो घटना वाले दिन की उसी दौरान उसका मोबाइल फोन बंद आया। आरोपियों से पूछताछ हुई तो खुशीराम ने वारदात में अपना हाथ होने की बात स्वीकार कर ली। उससे पूछताछ के बाद वारदात में इस्तेमाल बाइक भी बरामद कर ली गई। पुलिस पिस्टल बरामद करने का प्रयास कर रही है।

नाबालिग बेटे ने कई दिनों तक की पार्क की रेकी...
पुलिस की पूछताछ में आरोपी खुशीराम ने बताया कि बेगमपुर में उसका अपना मकान था। लखपत खुशीराम पर मकान बेचने का दबाव बना रहे थे। मना करने पर लखपत सिंह व उसके भाई धर्मेंद्र ने अपने साथियो के साथ मिलकर खुशीराम की पिटाई कर दी। मामले में खुशीराम की शिकायत पर लखपत के खिलाफ केस दर्ज हो गया।

इन लोगों ने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर उल्टा खुशीराम व उसके परिवार पर क्रॉस केस दर्ज करा दिया। 9 माह बिस्तर पर रहने के बाद वह अब तक उस केस को लड़ रहा था। इन सब से परेशान होकर उसने खुशीराम की हत्या की साजिश रची। पढ़ाई छोड़ चुके बेटे को उसने लखपत सिंह की हत्या की योजना में शामिल किया।

खुशीराम का बेटा 27 सितंंबर 2025 को 18 साल का होने वाला था। खुशीराम उससे पहले ही वारदात को अंजाम देकर बेटे को नाबालिग होने का फायदा दिलाना चाहता था। उसने शुक्रवार को ही हत्या करने की योजना बनाई। एक पिस्टल का इंतजाम कर नाबालिग ने कई दिन पार्क की रेकी की। लखपत सिंह के आने-जाने का टाइम देखा गया।

वारदात में इस्तेमाल होने वाली बाइक की नंबर प्लेट को हटा दिया गया। घटना वाले पिता-पुत्र हर कीमत पर लखपत सिंह कटारिया को मारने की नियत से पहुंचे थे। वारदात को अंजाम देने के बाद वह सीधे अपने घर पहुंचे। बाद में बाइक की नंबर प्लेट को लगा दिया। पुलिस ने बाइक भी बरामद कर ली है।

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