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दिल्ली विधानसभा चुनावः कांग्रेस उम्मीदवारों ने संभाला मोर्चा, बड़े नेताओं का इंतजार
Thu, 23 Jan 2020 04:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 23 Jan 2020 04:51 AM IST
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कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला
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नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद पहले दिन कांग्रेस उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्र में मोर्चा संभाल लिया, लेकिन इन्हें फिलहाल पार्टी के बड़े चेहरों का बेसब्री से इंतजार है। बुधवार को पार्टी के कई प्रत्याशियों ने लोगों से मिलना भी शुरू कर दिया।
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कोई पार्क तो कोई बाजार में लोगों से मिलकर समर्थन जुटाने में लगा है, जबकि कई प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिन्हें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का इंतजार है। इनका मानना है कि बड़ी शख्सियत के मैदान में आने से उन्हें काफी समर्थन मिल सकता है।
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वे चाहते हैं कि कांग्रेस के तमाम बड़े नेता उनके क्षेत्र में आकर लोगों से मुलाकात करें। इतना ही नहीं कुछ क्षेत्रों में प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिन्होंने सबसे पहले पार्टी के पुराने और कद्दावर नेताओं के घर जाकर सबसे पहले समर्थन लिया। जानकारी के अनुसार, पार्टी से नाराज चल रहे पुराने नेताओं को साथ में लेकर जनता के बीच में जाने के निर्देश पार्टी हाईकमान ने ही दिए हैं।
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वहीं कृष्णा नगर में डॉ. एके वालिया, गांधी नगर में अरविंदर सिंह लवली, पटेल नगर में कृष्णा तीरथ, मटियाला में सुमेश शौकीन, सीलमपुर में मतीन अहमद और मंगोलपुरी में राजेश लिलौटिया सुबह से ही जनता के बीच नजर आए।
इनका मानना है कि स्टार प्रचारक का इंतजार करने से बेहतर जनता के बीच समय देना है। मटियाला में सुमेश शौकीन ने सुबह से शाम तक पांच जनसभाएं तक कीं, जिनमें उन्होंने आप और भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि ये लोगों को गुमराह कर रही हैं।
दरअसल दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 सीटों पर आप और भाजपा को टक्कर देने के इरादे से मैदान में उतरी कांग्रेस इस बार अपने खोए जनाधार को वापस पाने के लिए पूरा जोर लगाने का दावा कर रही है। कांग्रेस ने दिल्ली में 10 विधानसभा क्षेत्रों पर महिला प्रत्याशियों को उतारा है।
खुद से ज्यादा शीला सरकार की दुहाई
एक तरफ कांग्रेस के प्रत्याशी फ्रंटफुट पर आकर चुनावी पारी संभाल चुके हैं, वहीं जनता के बीच में ज्यादातर प्रत्याशियों की जुबां पर शीला सरकार के किस्से ही सुनाई दे रहे हैं। लगातार 15 वर्ष तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहीं पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार के कार्यों का हवाला देते हुए कांग्रेसी नेता आम आदमी पार्टी और भाजपा के शासन की तुलना कर रहे हैं। कोई मदन लाल खुराना तो कोई केजरीवाल सरकार की खामियां गिनाने में जुटा है।