कंफ्यूजन में सरकार एक काम के लिए दो अधिकारी
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दिल्ली सचिवालय और राज निवास के बीच तकरार में नया ट्विस्ट आ गया है। सरकार में गृह सचिव और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) में मुखिया के लिए एलजी और सीएम की तरफ से एक-एक खिलाड़ी दंगल में उतारे गए हैं।
सरकार में गृह सचिव और एसीबी चीफ के पद पर दो-दो अधिकारी काम कर रहे हैं। ऐसे में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। सरकार के पक्ष का कहना है कि इन दोनो को हटा दिया गया है जबकि राज निवास का तर्क है कि दोनों की नियुक्ति एलजी ने की है तो यही पद पर हैं।
सोमवार को एसीबी में ज्वाइंट कमिशनर के पद पर मुकेश मीणा की नियुक्ति की गई। उसी दिन उन्होंने चार्ज संभाल लिया। दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशक एसके जैन ने पद नहीं होने का हवाला देकर वापस दिल्ली पुलिस में रिपोर्ट करने को कहा लेकिन मीणा ने वापस पत्र लिख दिया कि एलजी का आदेश मानेंगे।
इसके बाद मीणा की नियुक्ति का आदेश करने वाले उप गृह सचिव आलोक गर्ग ने खुद का आदेश वापस लेने का नया आदेश मंगलवार को जारी कर दिया। लेकिन बुधवार को भी मुकेश मीणा दफ्तर में तैनात थे।
दिल्ली सरकार एलजी के फैसले मानने को तैयार नहीं
दूसरी तरफ दिल्ली सरकार ने एसीबी में संयुक्त आयुक्त के पद पर मुकेश मीणा की नियुक्ति का एलजी का आदेश सीधे मानने के लिए प्रधान गृह सचिव धर्मपाल को वापस गृह मंत्रालय भेजने का आदेश दिल्ली सरकार के सेवा सचिव राजेंद्र कुमार ने मंगलवार को ही कर दिया था। इसे एलजी ने रद्द कर दिया। लेकिन दिल्ली सरकार इसे मानने को तैयार नहीं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार धर्मपाल अब गृह सचिव नहीं हैं। राजेंद्र कुमार गृह सचिव हैं तो फिर फाइल भी उन्हीं के पास जाएगी। वहीं, दूसरी तरफ प्रधान गृह सचिव कार्यालय से यह साफ हुआ है कि वीजा की अंतिम स्वीकृति देने, दिल्ली पुलिस की तमाम फाइलें प्रधान सचिव साइन कर रहे हैं।
फाइलें यहीं आ रही हैं। हालांकि यह बात सामने आई हैं कि गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के कार्यालय से बुधवार को न तो कोई फाइल प्रधान गृह सचिव के कार्यालय में आई है, न ही कोई फाइल यहां से गृहमंत्री के कार्यालय को भेजी गई है।