दिल्ली सरकार व मुख्य सचिव की तकरार की गूंज विधानसभा तक
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दिल्ली की चुनी हुयी सरकार और मुख्य सचिव के बीच चल रही तकरार विधानसभा कमेटी तक पहुंच गयी है। सदन में प्रश्न व संदर्भ समिति का कहना है कि मुख्य सचिव कमेटी की कार्रवाई से बचने के लिये झूठ का सहारा ले रहे हैं। कार्रवाई में भाग न लेने के मकसद से उन्होंने अदालत की शरण ली है। इसमें उन्होंने अपने साथ हुई कथित मारपीट का भी जिक्र किया है। मुख्य सचिव के रवैये से दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक घोटाले की जांच आगे नहीं बढ़ रही है।
कमेटी ने इस बारे में रविवार को बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सहकारी बैंक के करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा मामला विधान सभा अध्यक्ष के सामने जनवरी 2017 को आया था। उन्होंने इस मामले को सदन की प्रश्न और संदर्भ समिति को भेज दिया। समिति मार्च 2017 से मामले की जांच कर रही है।
लेकिन बीते दिनों मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। कमेटी के मुताबिक, मुख्य सचिव के तथ्यों से जिस तरह छेड़छाड़ की है, उससे कमेटी हैरान है। समिति ने बार-बार बुलाने के बाद भी कार्रवाई में हिस्सा न लेने के लिये उन्हें विशेषाधिकार नोटिस भेजा गया था। मुख्य सचिव इसे अब कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
कमेटी ने मुख्य सचिव पर झूठ बोलने का आरोप लगाया
कमेटी ने मुख्य सचिव पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुये इस पर आपत्ति जाहिर की है। साथ ही चुनौती भी दी है कि अगर अंशु प्रकाश अपने हलफनामे में दी गई बातों में कोई बदलाव नहीं किया तो उनका झूठ पकड़ा जाएगा।
कमेटी के मुताबिक, यह रिकॉर्ड पर है कि अंशु प्रकाश 16 फरवरी को समिति के सामने उपस्थित हुये थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि पूर्व व मौजूदा रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटी के बैठक में नहीं हैं।
ऐसे में उनको समय दिया जाये। समिति ने मुख्य सचिव को समय भी दिया। लेकिन इसके बाद से वह लगातार आनाकानी कर रहे हैं। वहीं, आरसीएस कहना है कि वह मुख्य सचिव का आदेश न मिलने तक वह बैठक में शामिल नहीं होंगे।
कमेटी का कहना है कि मुख्य सचिव अपने साथ हुयी कथित मारपीट के बारे में पुलिस को दी गयी शिकायत का उपयोग सहकारी बैंक घोटाले से ध्यान हटाने के लिए एक ढाल के रूप में कर रहे हैं। समिति की कार्रवाई का सरकार के कार्यकारी निर्णय से कोई लेना देना नहीं है। विधानसभा समिति की कार्यवाही पूरी तरह से भिन्न और एक अलग मामले से संबंधित है।