कंडोम के दाम पर लगाम लगाएगी सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार ने माना कि कंडोम मेडिकल डिवाइस है, लेकिन औषधि अधिनियम के तहत यह दवा की श्रेणी में आता है। ऐसे में इसके दामों पर नियंत्रण लगाना सरकार का दायित्व है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार के अधिवक्ता सुमित पुष्करणा ने जवाब दाखिल किया है। उन्होंने तर्क दिया कि कंडोम डिवाइस होते हुए भी औषधि अधिनियम की धारा 2 के तहत दवा की श्रेणी में है।
इसके चलते सरकार ने इसके दामों पर नियंत्रण लगाने का निर्णय किया, जो उचित है। उन्होंने कहा कंडोम निर्माता कंपनियों ने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अदालत ने अभी तक कोई राहत नहीं दी है। इसके बावजूद कंपनियां मनमाने दामों पर कंडोम बेच रही हैं।
6 रुपये का कंडोम 200 में रहीं कंपनियां
सरकार के अनुसार अधिकतम कीमत छह रुपये तय है, लेकिन कंपनियां 200 रुपये तक में बेच रही हैं। अदालत ने हाल ही में सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि कंडोम दवा है या डिवाइस।
अदालत कंडोम बनाने वाली एक कंपनी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। कंपनी ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कंडोम को दवा की श्रेणी में रख, आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इसके दाम पर नियंत्रण लगा दिया। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 17 अप्रैल तय की है।
हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क रखते हुए केंद्र सरकार ने आरोप लगाया कि कंडोम निर्माता कंपनियां आदेश का उल्लंघन कर महंगे दामों पर बेच रही हैं। उस पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाए।