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समाधान की कवायदः पराली से खेत में बनेगी खाद, जलाने की नहीं होगी जरूरत
Thu, 17 Sep 2020 03:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 17 Sep 2020 03:52 AM IST
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गोपाल राय
- फोटो : एएनआई
दिल्ली सरकार ने पराली के धुएं का समाधान निकालने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा में विकसित पराली से खेत में खाद बनाने की बॉयो डी-कंपोजन तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना है।
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पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इसी सिलसिले में बुधवार पूसा का दौरा कर तकनीक को नजदीक से देखा। गोपाल राय के मुताबिक, अगर तकनीक सफल रहती है तो दिल्ली में पराली से सीधे खेतों में खाद बनाई जाएगी। इससे पराली जलाने की समस्या दूर हो सकेगी।
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गोपाल राय ने बताया कि दिल्ली सरकार किसानों को यह सुविधा नि:शुल्क मुहैया कराएगी। साथ ही केंद्र व पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश की प्रदेश सरकारों से बात कर इस तकनीक पर काम करने को कहा जाएगा। पर्यावरण मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि पिछले साल पंजाब में करीब 90 लाख टन और हरियाणा में 12.30 लाख टन पराली जलाई गई। इसका धुंआ दिल्ली पहुंचने से दिल्ली की हवा दमघोंटू हो गई थी।
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गोपाल राय के मुताबिक, सर्दियों में दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या भयंकर रूप से उत्पन्न होती है। पिछले साल के अध्ययन बताते हैं कि नवंबर में दिल्ली के अपने प्रदूषण के साथ 44 प्रतिशत प्रदूषण पराली से हुआ था। इससे हवा दमघोंटू हो गई थी। दिल्ली के अंदर पराली बहुत कम पैदा होती है, लेकिन पंजाब व हरियाणा में इसकी मात्रा बहुत ज्यादा है।
गोपाल राय ने बताया कि केंद्र सरकार ने एक योजना बनाई है, जिसमें पराली के लिए किसानों को कुछ मदद दी जाती है, उसके लिए मशीन खरीदी जाती है, जिसमें आधा पैसा किसानों को देना पड़ता है और आधा पैसा सरकार देती है।
पिछले दिनों पूसा के डॉयरेक्टर ने एक मुलाकात में बताया था कि उन्होंने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, अगर डी-कंपोजर के माध्यम से खेत में ही पराली पर केमिकल का छिड़काव किया जाए, तो वहीं पर पराली खाद बन सकती है। दिल्ली सरकार इस दिशा में काम करेगी।