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Delhi NCR News: सीवर कर्मियों को नियमित करने और मौत पर 1 करोड़ की मांग, कोर्ट ने सरकार व डीजेबी से मांगा जवाब
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को नोटिस जारी किया है। याचिका में राजधानी के सभी सीवर कर्मियों को नियमित करने और हर मृत सीवर या सेप्टिक टैंक कर्मी के परिवार को एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा देने की मांग की गई है। याचिका में मृत सीवर कर्मियों के आश्रितों में से एक को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का निर्देश भी मांगा गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सरकारी अधिकारियों को संबंधित आंकड़े एकत्र कर अदालत को पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया। याचिका दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच द्वारा दायर की गई। इसमें कहा कि सीवर कर्मी आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे हाशिए पर रहने वाले वर्गों में शामिल हैं। उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जाता है और भविष्य निधि, ग्रेच्युटी व बोनस जैसे लाभ नहीं मिलते। याचिका में तर्क दिया गया कि सफाई कर्मचारी अनुपचारित मानव अपशिष्ट, जहरीली गैसों, दूषित पानी और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों के बार-बार संपर्क में आने से पुरानी बीमारियों, स्थायी विकलांगता और व्यावसायिक रोगों से पीड़ित रहते हैं। इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा भी प्रभावित होती है।
इसलिए याचिकाकर्ता ने दिल्ली में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को पूरी तरह यांत्रिक बनाने तथा सीवर व मैनहोल में खतरनाक मैनुअल एंट्री पर रोक लगाने की मांग की है। ठेकेदारों, नियोक्ताओं और सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक, विभागीय और दीवानी कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की गई है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को नोटिस जारी किया है। याचिका में राजधानी के सभी सीवर कर्मियों को नियमित करने और हर मृत सीवर या सेप्टिक टैंक कर्मी के परिवार को एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा देने की मांग की गई है। याचिका में मृत सीवर कर्मियों के आश्रितों में से एक को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का निर्देश भी मांगा गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने सरकारी अधिकारियों को संबंधित आंकड़े एकत्र कर अदालत को पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया। याचिका दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच द्वारा दायर की गई। इसमें कहा कि सीवर कर्मी आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे हाशिए पर रहने वाले वर्गों में शामिल हैं। उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जाता है और भविष्य निधि, ग्रेच्युटी व बोनस जैसे लाभ नहीं मिलते। याचिका में तर्क दिया गया कि सफाई कर्मचारी अनुपचारित मानव अपशिष्ट, जहरीली गैसों, दूषित पानी और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों के बार-बार संपर्क में आने से पुरानी बीमारियों, स्थायी विकलांगता और व्यावसायिक रोगों से पीड़ित रहते हैं। इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा भी प्रभावित होती है।
इसलिए याचिकाकर्ता ने दिल्ली में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को पूरी तरह यांत्रिक बनाने तथा सीवर व मैनहोल में खतरनाक मैनुअल एंट्री पर रोक लगाने की मांग की है। ठेकेदारों, नियोक्ताओं और सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक, विभागीय और दीवानी कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की गई है।
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