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Delhi: अब दवाओं का भ्रामक प्रचार नहीं कर पाएंगी कंपनियां, हो सकती है एक साल की जेल, जुर्माना या दोनों
Tue, 09 Apr 2024 05:26 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 09 Apr 2024 05:26 AM IST
सार
दिल्ली में आयुर्वेद, सिद्ध यूनानी व होम्योपैथी दवाओं की कंपनियां भ्रामक प्रचार नहीं कर पाएंगी। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक सूचना जारी की है। ऐसा करने पर आरोपी को एक साल तक की सजा, भारी जुर्माना या दोनों किया जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में आयुर्वेद, सिद्ध यूनानी व होम्योपैथी दवाओं की कंपनियां भ्रामक प्रचार नहीं कर पाएंगी। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक सूचना जारी की है। ऐसा करने पर आरोपी को एक साल तक की सजा, भारी जुर्माना या दोनों किया जा सकता है। सूचना में कहा गया है कि औषधि एवं चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की अनुसूची रोगों को लेकर आयुर्वेद, सिद्ध यूनानी एवं होम्योपैथी या किसी अन्य औषधि का विज्ञापन नहीं किया जा सकता।
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आयुर्वेद, सिद्ध यूनानी व होम्योपैथी से जुड़े अस्थमा, अंधापन, कैंसर, मोतियाबिंद, बहरापन, मधुमेह, मासिक धर्म और गर्भाशय संबंधी विकार, तंत्रिका संबंधी विकार, जलोदर, मिर्गी, महिला वक्ष की संरचना, कद, पित्त की पथरी, गुर्दे और मूत्राशय की पथरी, लकवा, पागलपन, ल्यूकोडर्मा, मोटापा, गठिया, यौन नपुंसकता, महिलाओं में बांझपन, यौन रोग और एचआईवी एड्स सहित दूसरे रोग को लेकर दवाओं का विज्ञापन नहीं कर पाएंगे। ऐसा करने वालों पर औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के प्रावधान के तहत सजा हो सकती है।
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वहीं इस आदेश को लेकर दिल्ली के डॉक्टरों का कहना है कि यह अच्छा फैसला है। विभिन्न कंपनियां दावा करती हैं कि वह उक्त रोग को जड़ से खत्म कर देंगे। लोग प्रचार को देखकर दवाओं का सेवन करते हैं। इससे शरीर को नुकसान हो सकता है। ऐसे में यह आदेश काफी महत्वपूर्ण है। इस आदेश को सख्ती से लागू करना चाहिए।
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