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वाईएमसीए से जुड़ सकते हैं कई कॉलेज
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:04 AM IST
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यदि सब कुछ ठीक रहा तो वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय से आसपास के छह जिलों के इंजीनियरिंग कॉलेज जुड़ जाएंगे। 21 नवंबर को इसी मुद्दे पर तकनीकी शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव अनिल चौधरी के साथ छह कुलपतियों की मीटिंग होनी है।
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वाईएमसीए विश्वविद्यालय को नैक द्वारा 'ए ग्रेड मिलने के बाद दावा और मजबूत हो गया है। नैक ग्रेडिंग के बाद विश्वविद्यालय ने अपना फोकस एनबीए ग्रेडिंग पर कर रखा है। जिसके लेकर तैयारियां जोरों पर हैं।
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बता दें अभी तक फरीदाबाद समेत पलवल, गुड़गांव, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ जिलों के तकनीकी कॉलेजों के हजारों छात्रों को अपने काम के लिए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) भागना पड़ता है।
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दिसंबर 2007 में वाईएमसीए को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। लेकिन नौ साल बाद भी विश्वविद्यालय के अधीन न कोई कॉलेज है और ना ही पूरेे संसाधन। विश्वविद्यालय में अभी तक कुल 3000 विद्यार्थी विभिन्न संकायों में अध्ययन कर रहे हैं।
'ए ग्रेड से बंधी उम्मीद
सूत्रों की मानें तो भाजपा सरकार वाईएमसीए सहित अन्य विश्वविद्यालय को कैंपस विश्वविद्यालय न बनाकर प्रदेश भर के कॉलेज बांटना चाहती है। जिसके बारे में उच्चाधिकारियों में सहमति बन गई है। पिछले दिनों वाईएमसीए को मिले 'ए ग्रेड से उम्मीद और बंध गई है।
गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, पलवल, फरीदाबाद और झज्जर जिलों के सौ से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज वाईएमसीए से जुड़ सकते हैं। इन कॉलेजों के यूनिवर्सिटी में संबंद्धित होने से जहां विश्वविद्यालय के विकास को पंख लगेंगे। वहीं छात्रों की संख्या बढ़ने से बजट राशि में बढ़ोतरी होगी। यूनिवर्सिटी अपने विकास में भी कुछ कर सकेगी।
होगा यूनिवर्सिटी का विकास
यह प्रदेश सरकार के अधीनस्थ मामला है। लेकिन, यदि ऐसा होता है तो निर्णय शिक्षा के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। लाखों विद्यार्थियों के साथ यूनिवर्सिटी का भी विकास होगा। हम इस निर्णय के क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। -प्रो. दिनेश अग्रवाल, कुलपति, वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय