सड़कों पर दौड़ेंगे सीएनजी लगे दोपहिया वाहन, एक्टिवा बेस मॉडल से होगी शुरुआत
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आपकी दोपहिया भी अब सीएनजी से चल सकेगी। दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने दोपहिया में रेट्रोफिटमेंट के लिए पहली सीएनजी को मंजूरी दे दी है। शुरुआत एक्टिवा के बेस मॉडल से होगी, जो भविष्य में 81.75 सीसी से 136.25 सीसी तक के दोपहिया में लगाए जा सकेंगे।
एक बार में दो सिलेंडरों में सवा किलो सीएनजी भरी जा सकेगी, जो 100-115 किमी तक चलेगी। मसलन दिल्ली में 37 रुपये प्रति किलो मिलने वाली सीएनजी से दोपहिया चलाने का खर्च 50 पैसे किमी आएगा।
अमर उजाला के पास मौजूद स्वीकृत पत्र व सर्कुलर के अनुसार आईटुक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की जिस 4 स्ट्रोक इंजन वाले पेट्रोल दोपहिया के लिए रेट्रोफिटमेंट किट को मंजूरी दी गई है, वह 1 अप्रैल, 2010 से 31 मार्च, 2016 के बीच निर्मित होना चाहिए।
यूरो-3 मानक के दोपहिया में ये लगाई जा सकेगी। किट को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) से पहले मंजूरी मिली थी। भविष्य में जिन शहरों में सीएनजी की उपलब्धता है, वहां की सरकार (परिवहन विभाग) से एजेंसी की मंजूरी लेने की योजना है।
अमर उजाला से बातचीत में कंपनी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि किट जून के दूसरे पखवाड़े तक मार्केट में आ जाएगी। दोपहिया के सीएनजी से एवरेज को लेकर प्रतिनिधि ने बताया कि जितनी कोई गाड़ी 1 लीटर पेट्रोल से चलती है, उतनी 0.585 किलो ग्राम सीएनजी से चलेगी।
मसलन जो दो सिलेंडर लगेंगे उसमें 1.25 किलो से 1.35 किलो सीएनजी भरी जाएगी। इससे 100-115 किमी तक चल सकेगी। हालांकि किट की कीमत को लेकर कुछ साफ नहीं किया है।
कंपनी प्रतिनिधि का कहना है कि अभी एक्टिवा के बेस मॉडल से शुरुआत होगी, जिसे सिर्फ ड्राइंग अप्रूवल के बाद स्वीकृत इंजन क्षमता वाले सभी दोपहिया में लगाया जा सकेगा। ईरान से जुड़ी कंपनी है, जहां 4 लाख दोपहिया को सीएनजी किट लगाने का काम चल रहा है।
दिल्ली में दोपहिया की संख्या तेजी से बढ़ेगी दिल्ली में सीएनजी 36.60 रुपये और एनसीआर में 41.90 रुपये प्रति किलो है। राजधानी में सम-विषम फार्मूला लागू होने के बाद दोपहिया का रजिस्ट्रेशन भी बढ़ा है।
ऐसे में सार्वजनिक परिवहन में धक्का-मुक्की के बीच महज 50 पैसे प्रति किमी खर्च की वजह से दोपहिया की संख्या और बढ़ने की संभावना है। शुरुआत में किट रेट्रोफिटमेंट दिल्ली नंबर के दोपहिया का ही होगा। मार्च, 2017 तक यूरो-तीन वाहन का रजिस्ट्रेशन जारी है। भविष्य में किट का मानक बदलकर यूरो-4 में भी लाई जा सकेगी।