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जाटों को समझाएंगे भाजपा कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री ने की बैठक

Fri, 17 Feb 2017 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 17 Feb 2017 12:17 AM IST
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cm will meet jat leaders in noida soon
मनोहर लाल खट्टर - फोटो : अमर उजाला

जाट आरक्षण को लेकर भाजपा आलाकमान के दखल के बाद अब प्रदेश सरकार ने पार्टी कार्यकर्ताओं की फौज को उतारने का निर्णय लिया है। बृहस्पतिवार को सिविल लाइन के स्वतंत्रता सेनानी भवन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खुद मोर्चा संभालते हुए प्रदेश के जाट बाहुल्य 10 इलाकों के पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

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जाट मंत्रियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री 3 घंटे तक जाट आंदोलन को लेकर रास्ता तलाशने में जुटे रहे, लेकिन कोई निर्णय नहीं निकलने के कारण अब सरकार के प्रति विश्वास बहाल करने और सरकार के प्रयास को जाट नेताओं के बीच पहुंचाने का निर्देश पार्टी कार्यकर्ताओं को मिला है।
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सीआईडी रिपोर्ट लीक होने के बाद सहमी मनोहर सरकार अब इसे संभालने में जुटी है। सरकार की ओर से पहले जाट नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया, लेकिन बाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की बात कहकर वार्ता टाल दी गई।
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बैठक के बाद कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने मौजूदा स्थिति के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के अंतिम समय में कच्चा आरक्षण दिया था और इस मामले को राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग में भी नहीं भेजा गया था।

जिसकी वजह से मौजूदा स्थिति पैदा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद मीडिया के सामने नहीं आए। जाट आरक्षण की वकालत करने वाले चौधरी बिरेंद्र सिंह भी मीडिया से दूर रहे।

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार खुले मन से बातचीत को तैयार है और जाट नेता सरकार के सामने आकर अपना पक्ष रखें। उन्होंने कहा कि जाट समाज ने जिस प्रकार से वर्तमान राज्य सरकार को सुझाव दिया, उसी अनुरूप हरियाणा में जाटों को आरक्षण दिया गया।

इसके बाद मामला न्यायालय में चला गया, उसके बाद भी जाट समाज की इच्छा से ही अधिवक्ता जगदीप धनखड़ को न्यायालय में पैरवी के लिए रखा गया। उच्चतम न्यायालय में सुनवाई जल्दी हो, इस पर भी सरकार ने संज्ञान लेते हुए जल्द सुनवाई का आग्रह न्यायालय से  किया है।

उन्होंने कहा कि जहां तक जाट आरक्षण के मामले को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने की बात है, उस दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। धनखड़ ने कहा कि पिछले वर्ष जाट आंदोलन में मारे गए मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहयोग व नौकरी दी गई है। और नौकरी देने के लिए भी सरकार खुले मन से तैयार है।

आंदोलन के दौरान घायल हुए व्यक्तियों की मदद करने को भी तैयार है। धनखड़ ने कहा कि पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को भी वापस लेने की मांग पर सरकार ने कार्रवाई करते हुए अब तक 1500 मुकदमे वापस लिए हैं तथा 622 बाकी हैं।

बैठक में केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बिरेंद्र सिंह, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पवार, मुख्य संसदीय सचिव डॉ. कमल गुप्ता, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला, सांसद धर्मवीर व रमेश कौशिक सहित मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्य, ओएसडी मीडिया राजकुमार भारद्वाज, भाजपा प्रवक्ता सूरजपाल अम्मू मौजूद थे।

जाट नेताओं के बीच रही भ्रम की स्थिति 
मुख्यमंत्री की इस बैठक को लेकर प्रशासन और जाट नेताओं के बीच तालमेल की कमी दिखी। पहले जाट नेताओं के साथ बैठक की जानकारी दी गई। जिसके कारण जाट स्वाभिमान समिति के सदस्य यहां पहुंचे थे। बाद में उन्हें केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की बात कहकर बाहर कर दिया।

इस बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और जाट स्वाभिमान समिति के सदस्यों के बीच तीखी नोकझाेंक हुई। इस मामले में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकर अमित आर्या को सफाई देनी। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन गैप के कारण यह भ्रम फैला है।


इसकेे बारे में तहकीकात की जाएगी। जाट स्वाभिमान समिति के संयोजक आरएस दहिया ने कहा कि उन्हें बाकायदा जिला उपायुक्त और पुलिस आयुक्त की तरफ से फोन आया था और इसकी जानकारी दी गई थी।

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