CM-LG में फिर जंग, केजरीवाल बोले जेटली को बचा रहे जंग
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डीडीसीए घोटाले के जांच आयोग को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच नई जंग छिड़ गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को उपराज्यपाल नजीब जंग पर हमला बोला।
केजरीवाल के मुताबिक, परिवहन घोटाले में फंसने के बाद उपराज्यपाल गृहमंत्रालय के चक्कर लगाते थे। अब वह अपने आका अरुण जेटली को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीडीसीए मामले में पूरी दाल ही काली दिख रही है।
अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल पर आरोप लगाया कि वह चुनी हुई सरकार के खिलाफ खबरें प्लांट करवा रहे हैं।
जांच आयोग के गठन को कैसे असंवैधानिक करार दे सकते हैं
वित्त मंत्री अरुण जेटली एलजी के जरिए आयोग को खत्म कराने की कोशिश कर रहे हैं। यह भ्रष्टाचार को बचाने की कोशिश है। हालांकि, केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि अगर उपराज्यपाल ने गृह मंत्रालय को डीडीसीए जांच आयोग को असंवैधानिक करार देने वाली चिट्ठी लिखी है तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह अरुण जेटली को बचाने की कोशिश नहीं करेंगे।
ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल 1993 का हवाला देते हुए कहा कि उपराज्यपाल के पास केवल जमीन, पुलिस और लोक व्यवस्था से जुड़े मामलों पर ही निर्णय लेने का अधिकार है।
लिहाजा वह जांच आयोग के गठन को कैसे असंवैधानिक करार दे सकते हैं?
अरविंद केजरीवाल के हमले
-उपराज्यपाल परिवहन घोटाले में फंस रहे हैं और वह चिट्ठी लीक कर रहे हैं तो यह गंभीर मामला है।
-केंद्र ने हमारे पीछे अपनी सभी एजेंसियां लगा दी और अब तो सीबीआई को भी हमारे पीछे छोड़ दिया।
-हमको डर नहीं लग रहा तो उनको किस बात का डर है। एक बार जांच आयोग बैठ जाएं तो सब सामने आ जाएगा। यहां तो दाल में काला ही नहीं है पूरी की पूरी दाल काली है।
-उन्हें (जेटली) जांच में सहयोग करना चाहिए। जेटली को उपराज्यपाल का दुरुपयोग बंद करके जांच आयोग के साथ सहयोग करना चाहिए।
- जेटली को अपने विधायक ओपी शर्मा पर भी ब्लॉग लिखना चाहिए।
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उपराज्यपाल ने लिखी गृहमंत्रालय को चिट्ठी
दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने डीडीसीए (दिल्ली और जिला क्रिकेट एसोसिएशन) के घोटाले की जांच के लिए बने जांच आयोग को गैरकानूनी और अमान्य करार दिया है, जिसके गठन का एलान केजरीवाल ने रविवार को किया था।
उपराज्यपाल ने केंद्र सरकार को लिखा है कि केजरीवाल ने ऐसे जांच आयोग के गठन के लिए उनसे इजाजत नहीं ली है। सूत्र बताते हैं कि कमीशन ऑफ इनक्वायरी एक्ट 1952 के मुताबिक सिर्फ केंद्र और राज्य की सरकारों को ही कमीशन गठन करने का अधिकार है।
चूंकि दिल्ली एक केंद्र शासित राज्य है, इसलिए केजरीवाल के लिए उपराज्यपाल के जरिए केंद्र से इसकी इजाजत लेना अनिवार्य है।