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मरीजों की जान बचाने के लिए बनेगा अस्पतालों का क्लस्टर, पहले होगी रोगी की पहचान

Mon, 15 Jun 2020 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण चट्ठा, गाजियाबाद
अरुण चट्ठा, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 15 Jun 2020 05:10 AM IST
सार

  • तीन श्रेणी के होंगे अस्पताल, कोविड और नॉन कोविड मरीज की पहचान किया जाएगा इलाज
  • शासन से नामित विशेष कार्य अधिकारी ने दी निजी चिकित्सकों का पूल बनाने की सलाह, काम शुरू
  • शहर के पांच जोन में लागू किया जाना है क्लस्टर, लोगों को मिल सकेगी इलाज की सुविधा

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Clusters of hospitals will be built to save the lives of patients
फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना संकट के बीच भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखकर इंतजाम जुटाने की कवायद तेज हो गई है। पर्यवेक्षक की सलाह पर अब जिले में क्लस्टर के हिसाब से मरीजों के इलाज के लिए इंतजाम किए जाएंगे, जिसके लिए निजी चिकित्सकों का पूल बनाया जाएगा। पूल में शामिल चिकित्सक सामान्य मरीजों से लेकर संक्रमित मरीजों का इलाज कर सकेंगे। कलस्टर में तीन तरह के हॉस्पिटल की श्रृंखला बनाई जाएगी। 

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इसमें अस्पताल कुछ इस तरह से तैयार होंगे कि कोविड और नॉन कोविड मरीज की पहचान कर दोनों का अलग-अलग इलाज किया जा सके। इन अस्पतालों में इलाज पूरी तरह से निजी खर्च पर होगा। गरीबों के लिए कुछ रियायतें दिए जाने की तैयारी है। पहले चरण में नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में क्लस्टर मॉडल का लागू किया जाएगा। उसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में इसे लागू किया जाएगा।
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योजना के तहत जिले में कविनगर, सिटी जोन, वसुंधरा, मोहननगर और विजय नगर क्षेत्र में अस्पतालों का क्लस्टर बनाने की तैयारी है। लोनी और मोदीनगर क्षेत्र के लिए भी इसी तरह की योजना है। इसमें अस्पतालों को चलाने के लिए पूरी तरह से निजी चिकित्सकों का पूल (टीम) बनाया जाएगा। 
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स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से कहा गया है कि वह कम से कम 100 चिकित्सकों की टीम एक पूल में तैयार करें, जिसमें कम से कम 10 फिजीशियन, 10 एनेस्थेटिक समेत अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक भी शामिल होंगे। फिर पूल के हिसाब से चिकित्सकों की तैनाती कलस्टर के हिसाब से तैयार किए गए अस्पतालों में की जाए। 

अगर पहली टीम 14 दिन संक्रमित मरीजों को देखेगी तो फिर एक सप्ताह का ब्रेक लेकर दो से तीन हफ्ते तक सामान्य मरीजों को देख सकेगी। इस तरह से जितनी बड़ी टीम होगी, उससे इलाज करने में उतना ही बड़ा लाभ होगा। इस पूरी योजना के पीछे सरकार की मंशा सभी मरीजों को इलाज उपलब्ध कराना है।

कुछ इस तरह की होगी अस्पतालों की श्रेणी

श्रेणी-1
इसमें सभी मरीजों के भर्ती होने की सुविधा होगी। यहां पर मरीजों की कोरोना जांच की जाएगी। जांच हेतु मशीन शासन की ओर से मुहैया कराई जाएगी। जांच की क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी मौजूदा समय में कोरोना की जांच कर रही मेडिकल कॉलेजों की टीम की होगी। कोरोना की जांच होने के बाद मरीजों को अलग-अलग अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाएगा। इस अस्पताल में टेस्टिंग, होल्डिंग, इमरजेंसी ट्रामा की सुविधा मरीजों को दी जाएगी।

श्रेणी-2
यह पूरी तरह से डेडिकेटिड कोविड अस्पताल होगा, जिसमें चिकित्सकों की कंप्लीट टीम लगी होगी। आईसीयू से लेकर वेंटिलेटर तक की सुविधा इस अस्पताल में होगी। यहां पर डॉक्टरों की तैनाती रोस्टर के हिसाब से की जाएगी, जिससे की मरीजों को इलाज मिल सके। यह एक तरह से कोविड-3 स्तर का अस्पताल होगा।

श्रेणी-3
यह अस्पताल पूरी तरह से नॉन कोविड होगा, जिसमें उन मरीजों का इलाज किया जाएगा जो कोरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारी से पीड़ित है लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा था। इस अस्पताल में सभी मरीज कोरोना जांच के बाद पहुंचेंगे, जिससे की संक्रमण न फैल सके। इस अस्पताल में एक तरह से गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को उचित इलाज दिया जाएगा।

एकल क्लीनिक वाले डॉक्टरों को पूल में लाने की तैयारी
मरीजों को इलाज दिलाने के पीछे असली मंशा एकल क्लीनिक वाले चिकित्सकों को एक बड़े सेटअप से जोड़ना है, जिससे की वे बेहतर संसाधनों के बीच मरीजों का इलाज कर सकें। शासन का मानना है कि बड़ी संख्या में निजी चिकित्सक ऐसे हैं, जो अपना क्लीनिक चलाते हैं। उनमें से गिने-चुने डॉक्टर ही अस्पतालों में मरीजों को देखे जाते हैं। अगर एकल क्लीनिक वाले चिकित्सकों को जोड़कर बड़े अस्पतालों का सेटअप तैयार किया जाए तो मरीजों का बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सकेगा।

मेरी तरफ से उन्हें सुझाव दिया गया था कि हर मरीज को इलाज दिलाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए अस्पतालों का क्लस्टर तैयार कने और चिकित्सकों का पूल बनाने को कहा गया। अगर हम ऐसा कर पाएंगे तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा। इसमें जिला स्तर पर अब तेजी से काम शुरू हो गया है।
- डॉ. वेद प्रकाश, शासन से नामित विशेष कार्य अधिकारी व विभागाध्यक्ष पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन, केजीएमयू

हमारी तरफ से काम शुरू हो गया है। 22-23 जून को वसुंधरा में पहले अस्पताल शुरू कर रहे हैं। उसके बाद यशोदा नेहरू नगर ने भी हमें 30 बेड दे दिए हैं। साथ ही नरेंद्र मोहन अस्पताल को भी कलस्टर में शामिल कर बड़े अस्पताल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। बाकी चिकित्सकों का पूल बनाने का काम भी तेजी से जारी है।
- डॉ. एनके गुप्ता,  सीएमओ

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