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दावे कुछ भी हों, लेकिन सच्चाई यहां मौत पर खत्म हुई
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Tue, 03 Mar 2015 11:12 PM IST
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मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग बेहतर सुविधा मुहैया कराने का दावा करता है, लेकिन दावे के विपरीत प्रसूति के दौरान मातृ मृत्यु रुकने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार देर शाम को भी प्रसूति के दौरान सिविल अस्पताल में एक महिला की मौत हो गई। बीते एक सप्ताह में तीसरी मौत है।
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जानकारी के मुताबिक, 28 वर्षीय पूजा को प्रसव पीड़ा उठने पर आननफानन में अस्पताल लाया गया। तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ चुकी थी कि वार्ड में लाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। पूजा के गर्भ में पल रहे शिशु ने भी दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, पूजा को एनीमिया था।
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उसके शरीर में चार एमएम से भी कम खून था। गर्भ धारण के दौरान किसी तरह का इलाज नहीं होने की वजह से पीलिया का भी पता नहीं चल पाया। स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि यदि पीलिया नहीं होता तो मां और बच्चे दोनों ही सुरक्षित थे। प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. असरूद्दीन का कहना है कि अस्पताल या डॉक्टर की लापरवाही के कारण महिला ने दम नहीं तोड़ा। मरीज के अंदर पहले से कई बीमारियां थी। खून की कमी मौत का मुख्य कारण है।
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