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Delhi: राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज, जानें HC ने क्या कहा
Fri, 20 Dec 2024 11:02 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 20 Dec 2024 11:02 PM IST
सार
एक आरटीआई दाखिल की गई थी, जिसमें उन्होंने 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' को एक 'सार्वजनिक प्राधिकरण' बताते हुए मुद्दा उठाया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ के समक्ष गृह मंत्रालय (एमएचए) और राम जन्मभूमि ट्रस्ट दोनों ने याचिका का विरोध किया।
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एएसजी चेतन शर्मा और सीजीएससी निशांत गौतम ने तर्क दिया कि ट्रस्ट एक स्वायत्त निकाय है और इसे सार्वजनिक प्राधिकरण के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने उनके तर्क स्वीकार करते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।
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नीरज कुमार द्वारा दायर याचिका में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 8 जुलाई, 2022 के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें ट्रस्ट के मुख्य लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) और प्रथम अपीलीय प्राधिकरण के बारे में विवरण का खुलासा करने से इनकार कर दिया गया था। कुमार ने जुलाई 2022 में गृह मंत्रालय (एमएचए) के पास भी इसी तरह की जानकारी मांगते हुए एक आरटीआई अनुरोध दायर किया था, लेकिन इसे एमएचए ने खारिज कर दिया था।
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मंत्रालय ने तर्क दिया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का न तो स्वामित्व है न ही नियंत्रण है और न ही भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है और इसलिए यह एक सार्वजनिक प्राधिकरण की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता है। याचिकाकर्ता की और से पेश वकील प्रशांत भूषण ने सीआईसी के आदेश को पलटने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की।