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Delhi NCR News: सीवर जाम, सड़क अधूरी... डेढ़ महीने से नरकीय जीवन जी रहा बघेल मोहल्ला
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नगरपरिषद-जनस्वास्थ्य विभाग की तकरार, बदबू और गंदगी झेल रहे मोहल्लेवासी
दिनेश देशवाल
नूंह।
विकास कार्य लोगों की सुविधा के लिए किए जाते हैं, लेकिन नूंह शहर के वार्ड-5 स्थित बघेल मोहल्ले में चल रहा गली निर्माण लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने से पूरी गली सीवर और नालियों के गंदे पानी से लबालब भरी हुई है, जबकि घरों का मल-मूत्र खुले रास्ते में बह रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। बदबू, गंदगी और मच्छरों के बीच रहने को मजबूर परिवार अब प्रशासनिक लापरवाही से तंग आ चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जनता की इस परेशानी का जिम्मेदार कौन है? नगरपरिषद का कहना है कि सीवर ब्लॉक होने से सड़क निर्माण रुक गया, जबकि जनस्वास्थ्य विभाग का आरोप है कि नगरपरिषद ने निर्माण के दौरान दोनों तरफ की नालियां तोड़ दीं, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई। दोनों विभागों की इस खींचतान में सबसे ज्यादा पिस रही है आम जनता।
शुक्रवार को मोहल्लेवासियों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष पहले नगरपरिषद कार्यालय पहुंचे और वहां अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी। जब वहां से कोई ठोस समाधान नहीं मिला तो लोग सीधे जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पहुंच गए। लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि शनिवार दोपहर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
दरअसल, गोंदाराम चौक से बड़े मदरसे के पीछे तक करीब 13 लाख 97 हजार रुपये की लागत से गली और नाली निर्माण कार्य चल रहा है। लंबे समय से जर्जर पड़ी इस गली को नया रूप देने के लिए सड़क को उखाड़ दिया गया, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही सीवर लाइन ब्लॉक थी। ऊपर से नालियों को भी तोड़ दिया गया, जिससे घरों का गंदा पानी और सीवर का मल-मूत्र सीधे सड़क पर जमा होने लगा। अब पूरी गली किसी सड़क की बजाय गंदे पानी के तालाब जैसी दिखाई देती है।
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स्थानीय निवासी राहुल बघेल, महबूब खान, विकास बघेल, ओमप्रकाश मास्टर, मास्टर भजनलाल, रुकसाना, ओमबती, राजन, खतीजा और राजबती ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि घरों के शौचालयों का उपयोग करना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवार मजबूरी में अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर जाकर दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। बुजुर्गों को फिसलकर चोट लगने के डर से दूसरे घरों में ठहराया गया है। छोटे बच्चों के लिए गली में निकलना खतरे से खाली नहीं है, जबकि गंदगी और बदबू के कारण लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि वे कई बार संबंधित विभागों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार एक विभाग दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देता है।
जनस्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता शकील अहमद ने लोगों को भरोसा दिलाया कि शनिवार दोपहर 12 बजे तक ब्लॉक सीवर लाइन खोल दी जाएगी और जब तक सड़क निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक नालियों का पानी सीवर लाइन में डालने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। दूसरी ओर नगरपरिषद के चेयरमैन संजय मनोचा का कहना है कि परिषद लगातार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही सीवर की समस्या दूर होगी, दो दिन के भीतर गली निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त अखिल पिलानी ने भी नगरपरिषद और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तुरंत समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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दिनेश देशवाल
नूंह।
विकास कार्य लोगों की सुविधा के लिए किए जाते हैं, लेकिन नूंह शहर के वार्ड-5 स्थित बघेल मोहल्ले में चल रहा गली निर्माण लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने से पूरी गली सीवर और नालियों के गंदे पानी से लबालब भरी हुई है, जबकि घरों का मल-मूत्र खुले रास्ते में बह रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। बदबू, गंदगी और मच्छरों के बीच रहने को मजबूर परिवार अब प्रशासनिक लापरवाही से तंग आ चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जनता की इस परेशानी का जिम्मेदार कौन है? नगरपरिषद का कहना है कि सीवर ब्लॉक होने से सड़क निर्माण रुक गया, जबकि जनस्वास्थ्य विभाग का आरोप है कि नगरपरिषद ने निर्माण के दौरान दोनों तरफ की नालियां तोड़ दीं, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई। दोनों विभागों की इस खींचतान में सबसे ज्यादा पिस रही है आम जनता।
शुक्रवार को मोहल्लेवासियों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष पहले नगरपरिषद कार्यालय पहुंचे और वहां अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी। जब वहां से कोई ठोस समाधान नहीं मिला तो लोग सीधे जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पहुंच गए। लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि शनिवार दोपहर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
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दरअसल, गोंदाराम चौक से बड़े मदरसे के पीछे तक करीब 13 लाख 97 हजार रुपये की लागत से गली और नाली निर्माण कार्य चल रहा है। लंबे समय से जर्जर पड़ी इस गली को नया रूप देने के लिए सड़क को उखाड़ दिया गया, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही सीवर लाइन ब्लॉक थी। ऊपर से नालियों को भी तोड़ दिया गया, जिससे घरों का गंदा पानी और सीवर का मल-मूत्र सीधे सड़क पर जमा होने लगा। अब पूरी गली किसी सड़क की बजाय गंदे पानी के तालाब जैसी दिखाई देती है।
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स्थानीय निवासी राहुल बघेल, महबूब खान, विकास बघेल, ओमप्रकाश मास्टर, मास्टर भजनलाल, रुकसाना, ओमबती, राजन, खतीजा और राजबती ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि घरों के शौचालयों का उपयोग करना भी मुश्किल हो गया है। कई परिवार मजबूरी में अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर जाकर दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। बुजुर्गों को फिसलकर चोट लगने के डर से दूसरे घरों में ठहराया गया है। छोटे बच्चों के लिए गली में निकलना खतरे से खाली नहीं है, जबकि गंदगी और बदबू के कारण लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि वे कई बार संबंधित विभागों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार एक विभाग दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देता है।
जनस्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता शकील अहमद ने लोगों को भरोसा दिलाया कि शनिवार दोपहर 12 बजे तक ब्लॉक सीवर लाइन खोल दी जाएगी और जब तक सड़क निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक नालियों का पानी सीवर लाइन में डालने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। दूसरी ओर नगरपरिषद के चेयरमैन संजय मनोचा का कहना है कि परिषद लगातार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही सीवर की समस्या दूर होगी, दो दिन के भीतर गली निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त अखिल पिलानी ने भी नगरपरिषद और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तुरंत समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।