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Delhi NCR News: कोड वर्ड में बिक रहा चीनी मांझा, धागा 302 के नाम से हो रही खरीदारी
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दुकानदार वसूल रहे ऊंची कीमत, एक चरखी 800 से 1300 रुपये में बिक रही
सख्ती के कारण दुकानदार खुले तौर पर नहीं, बल्कि पहले से बुकिंग के आधार पर बेच रहे है
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही राजधानी के बाजारों में जानलेवा चीनी मांझे की बिक्री जोर पकड़ रही है। इस मांझे को चोरी-छिपे धागा 302 जैसे कोड वर्ड के जरिये बेचा जा रहा है। दुकानदार अधिक कीमत लेकर पहले से बुकिंग कर खरीदारों को तय स्थान पर मांझे की डिलीवरी दे रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पतंगबाजी के शौक में युवा जान को खतरे में डाल कर चीनी मांजे की खरीदारी कर रहे हैं। प्रशासन की नजरों से बचकर चीनी मांझे की दुकनदारों ने बिक्री शुरू कर दी है।
पुरानी दिल्ली के मशहूर लाल कुआं बाजार में चीनी मांझा गुपचुप तरीके से बेचा जा रहा है। दुकानदार इसकी ऊंची कीमत वसूल रहे हैं, जहां एक चरखी की कीमत 800 से 1300 रुपये तक है। दुकानदार खरीदारों को पहले से ऑर्डर देने के लिए कह रहे हैं। पिछले वर्षों में इस मांझे की चपेट में आने से कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद, इसकी बिक्री पर लापरवाही बरती जा रही है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मांझा सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। तीज के त्योहार से शुरू होने वाला पतंगबाजी का उत्साह शौकीनों में बढ़ रहा है लेकिन यह मांझा न केवल बेजुबान जानवरों बल्कि इंसानों की जान के लिए भी खतरा बन रहा है।
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बुकिंग के जरिये हो रही चीनी मांझे की बिक्री
सदर बाजार, तुर्कमान गेट और ओखला की तंग गलियों में बिक्री शुरू हो गई है। पतंग और मांझा बेचने वाले दुकानदारों के अनुसार, चीनी मांझा अब खुले तौर पर नहीं, बल्कि पहले से बुकिंग के आधार पर बेचा जा रहा है। दुकानदारों ने बताया कि यह मांझा चरखी में नहीं बल्कि सादे कागज में लपेटकर बेचा जा रहा है। तुर्कमान गेट के एक दुकानदार ने बताया कि चीनी मांझा खरीदने के लिए पहले व्हाट्सएप पर ऑर्डर करना जरूरी है और इसके साथ डिलीवरी के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है। लाल कुआं बाजार में पतंग और मांझा खरीदने आए राहुल शर्मा ने कहा कि चीनी मांझा उपलब्ध तो है लेकिन इसके लिए पहले से ऑर्डर देना अनिवार्य है।
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दुकानदारों की सतर्कता
लाल कुआं बाजार के कई दुकानदार इस बार चीनी मांझे को लेकर पहले से अधिक सावधान हैं। उनका कहना है कि चोरी-छिपे मांझा बेचने वालों पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। दुकानदार अमित ने लोगों से अपील की कि न तो कोई चीनी मांझा बेचे और न ही इसे खरीदे। उन्होंने कहा कि इस मांझे को खरीदने वालों पर भी सख्ती बरती जानी चाहिए। कुछ दुकानदार अधिक मुनाफे के लालच में इसे बेच रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।
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चीनी मांझे की मांग त्योहारी सीजन में बढ़ जाती
दुकानदारों का कहना है कि चीनी मांझे की मांग त्योहारी सीजन में बढ़ जाती है, क्योंकि यह सूती धागे से ज्यादा मजबूत और धारदार होता है। एक चरखी की कीमत 700 से 1300 रुपये तक है। इसे खरीदने के लिए पहले से व्हाट्सएप पर ऑर्डर देना पड़ता है। कुछ दुकानदार अधिक मुनाफे के लिए तय स्थान पर डिलीवरी भी दे रहे हैं। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इस मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, फिर भी इसका अवैध कारोबार जोरों पर है।
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सख्ती के कारण दुकानदार खुले तौर पर नहीं, बल्कि पहले से बुकिंग के आधार पर बेच रहे है
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही राजधानी के बाजारों में जानलेवा चीनी मांझे की बिक्री जोर पकड़ रही है। इस मांझे को चोरी-छिपे धागा 302 जैसे कोड वर्ड के जरिये बेचा जा रहा है। दुकानदार अधिक कीमत लेकर पहले से बुकिंग कर खरीदारों को तय स्थान पर मांझे की डिलीवरी दे रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पतंगबाजी के शौक में युवा जान को खतरे में डाल कर चीनी मांजे की खरीदारी कर रहे हैं। प्रशासन की नजरों से बचकर चीनी मांझे की दुकनदारों ने बिक्री शुरू कर दी है।
पुरानी दिल्ली के मशहूर लाल कुआं बाजार में चीनी मांझा गुपचुप तरीके से बेचा जा रहा है। दुकानदार इसकी ऊंची कीमत वसूल रहे हैं, जहां एक चरखी की कीमत 800 से 1300 रुपये तक है। दुकानदार खरीदारों को पहले से ऑर्डर देने के लिए कह रहे हैं। पिछले वर्षों में इस मांझे की चपेट में आने से कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद, इसकी बिक्री पर लापरवाही बरती जा रही है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मांझा सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। तीज के त्योहार से शुरू होने वाला पतंगबाजी का उत्साह शौकीनों में बढ़ रहा है लेकिन यह मांझा न केवल बेजुबान जानवरों बल्कि इंसानों की जान के लिए भी खतरा बन रहा है।
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बुकिंग के जरिये हो रही चीनी मांझे की बिक्री
सदर बाजार, तुर्कमान गेट और ओखला की तंग गलियों में बिक्री शुरू हो गई है। पतंग और मांझा बेचने वाले दुकानदारों के अनुसार, चीनी मांझा अब खुले तौर पर नहीं, बल्कि पहले से बुकिंग के आधार पर बेचा जा रहा है। दुकानदारों ने बताया कि यह मांझा चरखी में नहीं बल्कि सादे कागज में लपेटकर बेचा जा रहा है। तुर्कमान गेट के एक दुकानदार ने बताया कि चीनी मांझा खरीदने के लिए पहले व्हाट्सएप पर ऑर्डर करना जरूरी है और इसके साथ डिलीवरी के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है। लाल कुआं बाजार में पतंग और मांझा खरीदने आए राहुल शर्मा ने कहा कि चीनी मांझा उपलब्ध तो है लेकिन इसके लिए पहले से ऑर्डर देना अनिवार्य है।
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दुकानदारों की सतर्कता
लाल कुआं बाजार के कई दुकानदार इस बार चीनी मांझे को लेकर पहले से अधिक सावधान हैं। उनका कहना है कि चोरी-छिपे मांझा बेचने वालों पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। दुकानदार अमित ने लोगों से अपील की कि न तो कोई चीनी मांझा बेचे और न ही इसे खरीदे। उन्होंने कहा कि इस मांझे को खरीदने वालों पर भी सख्ती बरती जानी चाहिए। कुछ दुकानदार अधिक मुनाफे के लालच में इसे बेच रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।
चीनी मांझे की मांग त्योहारी सीजन में बढ़ जाती
दुकानदारों का कहना है कि चीनी मांझे की मांग त्योहारी सीजन में बढ़ जाती है, क्योंकि यह सूती धागे से ज्यादा मजबूत और धारदार होता है। एक चरखी की कीमत 700 से 1300 रुपये तक है। इसे खरीदने के लिए पहले से व्हाट्सएप पर ऑर्डर देना पड़ता है। कुछ दुकानदार अधिक मुनाफे के लिए तय स्थान पर डिलीवरी भी दे रहे हैं। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इस मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, फिर भी इसका अवैध कारोबार जोरों पर है।