विरोध के बावजूद चाइनीज माल बेचने के लिए दुकानदार अपना रहे ये ट्रिक
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त्योहार के मौसम में पाकिस्तान का साथ देने पर बेशक चीनी माल का आम लोगों से लेकर मार्केट एसोसिएशन बहिष्कार कर रही हों, लेकिन चाइनीज माल पर मेड इन इंडिया का लेबल से बाजारों में सामान बिक रहा है।
क्योंकि चीन का सामान महीनों पहले हिंदोस्तान पहुंच चुका है, ऐसे में नुकसान से बचने के लिए मेड इन चाइना की बजाय मेड इन इंडिया को लेबल लगाकर भरपाई की जा रही है।
अमर उजाला ने आज राजधानी के कई थोक व फुटकर बाजारों का मुआयना किया तो यह सामने आया। हालांकि दिल्ली के बाजारों में चीनी बहिष्कार के चलते बिक्री में करीब तीस फीसदी की गिरावट दर्ज की जा रही है।
भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रानिक भागीरथ मार्केट के प्रेजीडेंट अजय शर्मा कहते हैं कि सामान तो तीन से चार महीने पहले ही भारत आ चुका था। ऐसे में अब बहिष्कार करना मुश्किल है। क्योंकि व्यापारियों का करोड़ों रुपये का माल गोदाम में है।
हालांकि ग्राहक जागरूक है, जिसके चलते करीब तीस फीसदी तक बिक्री में गिरावट दर्ज की जा रही है। दुकानों में तो ग्राहक को साफ बता दिया जाता है कि सामान चाइनीज है। हालांकि रेहड़ी-पटरी पर बिकने वाले सामान को भारतीय बताकर बेचा जा रहा है।
दिल्ली समेत एनसीआर में पटाखों की सबसे बड़ी मार्केट बाजार पाएवालाल में चीनी पटाखों के बेचने के बहिष्कार का सबसे अधिक असर देखने को मिल रहा है। दुकानों से लेकर रेहड़ी-पटरी पर चीनी पटाखें बिकते थे।
हालांकि इस बार मार्केट में चारों और चीनी पटाखे नहीं बेचे जा रहे हैं, के पोस्टर लगाकर ग्राहकों को जानकारी दी जा रही है। मेजिस्टक फायर वक्र्स के दयाल ने बताया कि भारत में तैयार पटाखे ही बिक रहे हैं।
वहीं, रेहड़ी-पटरी पर पटाखे बेच रहे आदिल ने बताया कि चीनी पटाखे लोग नहीं खरीदना चाहते, लेकिन अब चीनी पटाखों का लेवल मेड इन इंडिया हो गया है। बच्चों के अधिकतर कार्टून करेक्टर वाले पटाखे चीनी होते थे, वही पटाखे इस बार मेड इन इंडिया लेबल के साथ बिक रहे हैं। मार्केट में पटाखे बेशक भारतीय हैं लेकिन उनकी पैकेजिंग में चीनी पोस्टर ही सबसे अधिक हैं।
सदर बाजार में मां लक्ष्मी भी चीनी
एशिया की सबसे बड़ी थोक मार्केट सदर बाजार के प्रेजीडेंट राकेश के मुताबिक, बाजार में बेशक चीनी मॉल के बहिष्कार की बात हो रही हो, लेकिन मां लक्ष्मी की प्रतिभा से लेकर थ्री डी पोस्टर भी चीन में तैयार ही बिक रहे हैं।
क्योंकि चीन में तैयार मां लक्ष्मी, गणेश व सरस्वती की मूर्ति के दाम कम होने के साथ-साथ आकर्षक है। जबकि थ्री डी पोस्टर सस्ते पड़ते हैं। हालांकि इस बार करीब पंद्रह से बीस फीसदी तक ही गिरावट आ रही है।
अभी चीनी माल बेचना है मजबूरी : भागीरथ मार्केट के प्रेजीडेंट अजय शर्मा कहते हैं कि हम भी चीनी माल नहीं बेचना चाहते हैं, लेकिन बेचना मजबूरी है। क्योंकि भारत में बिकने वाला अधिकतर सामान का रॉ मेटीरियल चाइना से ही आता है।
दूसरा भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। जब तक यहां फैक्टरी लगाने का सेटअप नहीं बन जाता, तब तक कुछ भी बहिष्कार बैमाना होगा। क्योंकि अभी जो चीन से सस्ता माल लाकर यहां छोटा-मोटा व्यवसाय कर परिवार चला रहे हैं, वे सड़कों पर आ जाएंगे।
ऐसे में बेरोजगारी के साथ महंगाई और बढ़ेगी। इसलिए तीन से चार तक इंफ्रास्ट्रक्चर सेट करने के बाद हम भारत के बाजारों से चीन का तगमा मिटा सकते हैं।