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अंकल! मम्मी-पापा बिहार में फंस गए, घर में खाने को कुछ नहीं बचा, भूख से तड़पते बच्चों का दर्द

Fri, 15 May 2020 07:57 AM IST
शाहरुख खान अमित भाटिया, अमर उजाला, फरीदाबाद
अमित भाटिया, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 15 May 2020 07:57 AM IST
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Children suffering from hunger are asking for food on child helpline in faridabad of haryana
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अंकल! हमारे मम्मी-पापा लॉकडाउन से पहले बिहार गए थे और वहीं फंस गए। हम यहां गौंछी में एक किराए के मकान में रहते हैं। घर में राशन खत्म हो गया है। जो थोड़े बहुत पैसे थे, वे भी खत्म हो गए हैं। घर में खाने को कुछ नहीं बचा है। 
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बच्चों की यह व्यथा सुनकर चाइल्ड हेल्पलाइन के कर्मी ने सारी जानकारी अधिकारियों को दी, जिस पर उन बच्चों तक राशन पहुंचाया गया। लॉकडाउन के दौरान हेल्पलाइन नंबर पर आई 220 कॉल में से 196 खाने के लिए थीं। 
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चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर की जिला संयोजक सुनीता देवी ने बताया कि ऐसा ही एक और मामला खेड़ीपुल थाना क्षेत्र से आया था। फोन 11 साल के बच्चे ने किया था। उसने बताया कि उनके पिता नहीं हैं और माता दिव्यांग हैं। 
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लॉकडाउन से पहले 15 वर्षीय बड़ा भाई थोड़ा बहुत जो कमा कर लाता था, उसी से उनका घर चलता था, मगर वह भी बंद हो गया है। घर में खाने को कुछ नहीं बचा। इस पर हेल्पलाइन टीम ने उनके परिवार को राशन मुहैया करवाया। 
 

ऐसे में उनके पास इस तरह की कोई भी कॉल आई तो उन्होंने राशन उपलब्ध करवाया। इसके अलावा कई एनजीओ के साथ मिलकर स्लम बस्तियों में भी जरूरतमंद लोगों को भोजन बांटा गया।

अपोलो अस्पताल से बच्चे को लाकर दी दवा 
हेल्पलाइन संयोजक सुनीता देवी ने बताया खाने के अलावा दवा, मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों के बाहर फंसे होने या बाहर से आने के बाद फरीदाबाद नहीं आ पाने जैसी समस्याओं के समाधान के लिए भी उनके पास फोन आए। 

एक मामले में दयालबाग निवासी एक बच्चे की अपोलो अस्पताल से दवा चल रही थी। अस्पताल की ओर से बच्चे को निशुल्क दवा दी जाती है, मगर लॉकडाउन के कारण उसके अभिभावक अस्पताल से दवा लेने नहीं जा पा रहे थे। 

दवा समाप्त होने पर परिजनों ने हेल्पलाइन नंबर 1098 पर मदद मांगी। अभी तक टीम को चार लापता बच्चे भी मिले। इनमें दो को उनके परिजनों तक पहुंचा दिया गया, एक अस्पताल में उपचाराधीन है, जबकि एक को शेल्टर होम में रखा गया है।
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