अमर उजाला खास: पबजी से हिंसक हो रहे बच्चे, हत्या-लूट में बढ़ रहा विश्वास, दिनभर रहता तनाव
परीक्षा पे चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पबजी (प्लेयर अननोन बैटल ग्राउंड) खेल का जिक्र किया था। दरअसल, इस ऑनलाइन गेम ने एम्स में बाल मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। इनमें पबजी के ही हर सप्ताह चार से पांच नए मरीज पहुंच रहे हैं। गेम की लत में डूबे मरीजों की उम्र 8 से 22 साल तक के बीच है।
नौकरीपेशा युवा भी डॉक्टरों के पास काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इन युवाओं को फोन पर पबजी खेलना इतना पसंद है कि ये ऑफिस का पूरा लंच टाइम इसी में खपा देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि ब्लू व्हेल के बाद पबजी दूसरा सबसे ज्यादा लत लगाने वाले गेम के रूप में सामने आया है। जबकि और भी गेम मनोरंजन की जगह अब तनाव का कारण बन रहे हैं।
हालांकि, एम्स के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा की मानें तो ऑनलाइन गेम खेलना कोई अपराध नहीं है। ये एक मनोरंजन का साधन है, लेकिन देश में इसके कुछ और ही मायने सामने आ रहे हैं। इसके पीछे वजह है जागरूकता की कमी।
कई बार व्यवहारिक तौर पर भी ये फैक्टर काम करता है। उनके क्लिनिक में इस तरह के आए दिन मामले देखने को मिल रहे हैं। इससे लोगों खासतौर पर बच्चों में तनाव, सोशल फोबिया, अकेलापन आदि दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। 12-12 घंटे तक गेम खेलने की वजह से कई बार छात्रों को कॉलेज से भी निकाल दिया जा रहा है।
ऐसे शुरू हुआ है पबजी
मार्च 2017 में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज प्लेटफॉर्म पर यह गेम आया था। दिसंबर 2017 में ये गेम पूरी तरह से लोगों के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध हुआ। इस समय सभी तरह के मोबाइल फोन, इंटरनेट, विंडो और प्ले स्टेशन 4 पर ये उपलब्ध है।
दुनियाभर में 400 मिलियन बच्चे व युवा इस गेम को हर दिन खेल रहे हैं। जबकि भारत में इनकी संख्या करीब 5 करोड़ अनुमानित है। पबजी गेम में 100 प्लेयर एक आइलैंड पर उतरते हैं और अत्याधुनिक हथियारों के जरिये खुद का बचाव करते हुए दुश्मनों को मार गिराते हैं।
गेम में जो सुरक्षित क्षेत्र होता है, वह धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। इससे खिलाड़ी पर उसी क्षेत्र में रहने पर दबाव बढ़ता है। जो अंत में जीवित रहता है वह विजेता बनता है। इस गेम की बढ़ती लत के कारण ही भारत में सबसे पहले गुजरात व कर्नाटक राज्य ने इस पर प्रतिबंध लगाया। हाल ही में जम्मू कश्मीर में भी इस पर रोक लगा दी गई है।
एमसीआई-आईटी मंत्रालय तक से मांगा है जबाव
एम्स सहित दुनियाभर के डॉक्टरों का हवाला देते हुए मुंबई हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर आईटी मंत्रालय, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, महाराष्ट्र सरकार, माइक्रोसॉफ्ट कंपनी और पबजी गेम के यूएस निवासी सीईओ को नोटिस भेजा है।
एडवोकेट मरियम निजाम ने मुंबई के आर्य विद्या मंदिर स्कूल के 11 वर्षीय छात्र अहाद निजाम का हवाला देकर कोर्ट से तत्काल इस गेम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी जल्द ही इस तरह के गेम्स को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग की जा सकती है।
हिंसक बन रहे हैं बच्चे
सफदरजंग अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि ब्लू व्हेल की तरह पबजी गेम भी बच्चों को हिंसक बना रहा है। गेम में गोलियां चलाना, एक-दूसरे की हत्या करना, लूटपाट, आक्रामकता आदि को बढ़ावा दे रहा है। नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में इलाज के लिए पहुंचे बच्चों की काउंसलिंग में भी इसकी पुष्टि हो रही है।
ब्लू व्हेल गेम बच्चों को आत्महत्याएं करने के लिए प्रेरित कर रहा था। सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में भी पबजी सहित ऑनलाइन गेम की लत से परेशान हर सप्ताह दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 15 साल तक के बच्चों की संख्या ज्यादा है।