'बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी में आरोपी के मानव तस्करी में लिप्त होने की पूरी संभावना'
बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में आरोपी के मानव तस्करी में लिप्त होने की पूरी संभावना होती है। यह एक जघन्य अपराध है और इसमें लिप्त आरोपी जमानत का हकदार नहीं है।
हाईकोर्ट ने ऐसे ही मामले में आरोपी मो. इजहार अलीम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एसपी तेजी ने अपने फैसले में आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुलिस व एनजीओ ने 19 मई को आरोपी के फैक्टरी में छापा मारकर वहां काम कर रहे आठ बच्चों को मुक्त करवाया था।
अदालत ने कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट में सात बच्चों को नाबालिग पाया गया है। इसके अलावा आठवें बच्चे की रिपोर्ट आनी है। अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि इनमें से दो बच्चे उनके रिश्तेदार हैं और वापस अपने घर चले गए हैं।
छापे में आरोपी के फैक्टरी में काम करते मिले थे आठ बच्चे
इसके अलावा अन्य बच्चों के माता-पिता ने भी पुलिस को लिखकर बताया है कि वे भी उनके रिश्तेदार हैं और दिल्ली आए थे। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ बाल श्रम, ज्वेनाइल जस्टिस एक्ट व बंधुआ मजदूरी अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।
वे महसूस करते हैं कि मामले की जांच अभी आरंभिक स्थिति में है और इस बात की पूरी संभावना है कि वह मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध में लिप्त हो।
उन्होंने कहा कि यदि आरोपी को वर्तमान परिस्थितियों में जमानत दी गई तो वह बच्चों से संपर्क कर उन्हें धमकाने व प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है। अदालत ने कहा कि जांच हित में यह जरूरी है आरोपी को जमानत न दी जाए। अत: वे उसके आवेदन को खारिज करते हैं।