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मुख्य सचिव की पिटाई का मामला, दिल्ली पुलिस का आरोपी विधायकों को रिमांड पर लेने के सारे दावं फेल
अरुण कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Feb 2018 05:45 PM IST
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amanatullah khan
- फोटो : ANI
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मुख्य सचिव से मारपीट के मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी के विधायकों प्रकाश जरवाल और अमानतुल्ला खान को पुलिस रिमांड पर लेने के लिए दिल्ली पुलिस ने सभी कोशिशें की, लेकिन पुलिस अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाई।
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वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष ने आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए पूरी कोशिश की, लेकिन वह भी अपनी दलीलों से अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाया। नतीजतन दोनों पक्षों के तर्कों को दरकिनार करते हुए अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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तीस हजारी कोर्ट की महानगर दंडाधिकारी शेफाली बरनाला टंडन दो दिनों तक दोनों पक्षों के बीच हुई बहस में दोनों ही पक्ष अपने दावों को पूरी तरह साबित करने में नाकामयाब साबित हुए।
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पुलिस रिमांड लेने के लिए पहली दलील
chief secretary case
- फोटो : himanshu soni
तर्क संख्या-1. पुलिस ने मुख्य सचिव से मारपीट मामले में आम आदमी पार्टी के आरोपियों विधायकों प्रकाश जरवाल और अमानतुल्ला खान का दो दिन का पुलिस रिमांड लेने के लिए पहली दलील दी कि मुख्यमंत्री के सलाहकार वीके जैन के सामने यह घटना हुई, इसलिए आरोपियों का आमना-सामना कराने के लिए रिमांड की जरूरत है।
वहीं बचाव पक्ष ने घटना के वक्त मौजूद सभी अन्य विधायकों की सूची पेश करके पुलिस के रिमांड की मांग को कमजोर कर दिया।
तर्क संख्या-2. आरोपियों का पुलिस रिमांड लेने के लिए मुख्य सचिव को बेवक्त मीटिंग के लिए बुलाने, उनके साथ मारपीट करने और धमकी देने के लिए आरोपियों द्वारा पूछताछ में सहयोग न करने की दलील दी गई।
वहीं बचाव पक्ष ने घटना के वक्त मौजूद सभी अन्य विधायकों की सूची पेश करके पुलिस के रिमांड की मांग को कमजोर कर दिया।
तर्क संख्या-2. आरोपियों का पुलिस रिमांड लेने के लिए मुख्य सचिव को बेवक्त मीटिंग के लिए बुलाने, उनके साथ मारपीट करने और धमकी देने के लिए आरोपियों द्वारा पूछताछ में सहयोग न करने की दलील दी गई।
हाईकोर्ट के कई मामलों का हवाला दिया,
chief secretary case
- फोटो : himanshu soni
वहीं बचाव पक्ष ने उन मीटिंग के वक्त मौजूद सभी अन्य विधायकों की सूची पेश करके, किसी भी वक्त और कहीं भी हर तरीके से पूरे सहयोग की बात रखकर अपनी दावेदारी कायम कर ली।
तर्क संख्या-3. आरोपियों को न्यायिक हिरासत से बचाने के लिए बचाव पक्ष ने अदालत में हाईकोर्ट के कई मामलों का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने मामले को राजनीतिक और संवेदनशील मानते हुए और आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
तर्क संख्या -4. पुलिस ने 19 फरवरी की 11:34 मिनट से 11:42 बजे कुल 7 मिनट 8 सेकेंड के बीच घटना के होने की दलील दी। जबकि वहीं वीके जैने बयान दिया कि वह करीब 12 बजे मुख्य सचिव से मिले।
पुलिस इस घटना की सीसीटीवी फुटेज समय पर नहीं जुटा पाई जिस कारण दोनों पक्षों की दलीलें अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाईं।
तर्क संख्या-3. आरोपियों को न्यायिक हिरासत से बचाने के लिए बचाव पक्ष ने अदालत में हाईकोर्ट के कई मामलों का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने मामले को राजनीतिक और संवेदनशील मानते हुए और आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
तर्क संख्या -4. पुलिस ने 19 फरवरी की 11:34 मिनट से 11:42 बजे कुल 7 मिनट 8 सेकेंड के बीच घटना के होने की दलील दी। जबकि वहीं वीके जैने बयान दिया कि वह करीब 12 बजे मुख्य सचिव से मिले।
पुलिस इस घटना की सीसीटीवी फुटेज समय पर नहीं जुटा पाई जिस कारण दोनों पक्षों की दलीलें अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाईं।