प्रदूषण पर SC ने कहा, पहले पन्ने पर छापें खबर
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प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दत्तू ने कहा कि उन्होंने अपने पोते को मास्क लगाए हुए देखा। वह बिल्कुल निंजा (जापान में मध्यकालीन युग में मार्शल आर्ट से निपुण एजेंट जो चेहरे को ढक कर रखते थे) की तरह दिख रहा था। मैंने उससे इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि प्रदूषण के कारण मास्क पहन रखा है।
अखबार पहले पन्ने पर लें यह खबर: चीफ जस्टिस
इस मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीफ जस्टिस ने खासतौर पर कहा कि अखबारों को यह खबर पहले पन्नों पर प्रमुखता से छापनी चाहिए। साफ है कि अदालत भी चाहती है कि राजधानी में प्रदूषण की क्या स्थिति है, यह बात जनता तक पहुंचनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदूषण से बचने के लिए उनका पोता मास्क लगाता है।
व्यावसायिक वाहनों पर लगेगा टोल टैक्स
राजधानी में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक वाहनों पर टोल टैक्स के अलावा प्रदूषण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाने की अपील संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से आहत चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को सकारात्मक सोच के साथ बृहस्पतिवार तक जवाब देने के लिए कहा है। कोर्ट पर्यावरणविद एमसी मेहता द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान एमाइकस क्यूरी हरीश साल्वे ने पर्यावरण कानून के सिद्धांतों को प्रभावी तरीके से लागू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वालों को जुर्माना भरना ही चाहिए।
बच्चों बुजुर्गों को होती है सबसे परेशानी
उन्होंने पीठ से इस मामले में दखल देने की अपील करते हुए कहा कि राजधानी में प्रदूषण का स्तर हानिकारक स्तर तक पहुंच गया है। ठंड का मौसम नजदीक है और उस वक्त स्थिति और भी बदतर हो जाएगी।
साल्वे ने भी अपनी व्यथा पीठ को बताई कि प्रदूषण से वह और उनका परिवार किस तरह प्रभावित है। उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी और बेटी को अस्थमा है। उन्हें भी दो दिन पहले पहली बार एस्ट्रॉयट लेना पड़ा था।
साल्वे ने इनवायरमेंट पॉल्यूशन (प्रीवेंशन एंड कंट्रोल) अथॉरिटी फॉर एनसीआर (ईपीसीए) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारी संख्या में व्यावसायिक वाहन हाईवे की बजाए दिल्ली और एनसीआर की सड़कों से होकर गुजरते हैं क्योंकि यह किफायती होता है।
राजधानी के नौ एंट्री प्वाइंट से रोजाना करीब 35 लाख भारी वाहन दिल्ली के भीतर दाखिल होते हैं। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में दाखिल होने वाले व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स के अलावा प्रदूषण क्षतिपूर्ति शुल्क भी वसूला जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया कि वायु प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। वाहनों से निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है और यह फेफड़ों को प्रभावित कर रहा है।