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Delhi NCR News: यमुना के दोनों किनारों पर इस बार होगी छठ पूजा
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- मुख्यमंत्री ने की घोषणा, अधिकारियों को दिये घाट बनाने के निर्देश, जरूरत पड़ी तो हरियाणा से अतिरिक्त पानी की मांग करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
इस बार छठ पूजा यमुना नदी के दोनों किनारों पर होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसकी घोषणा की है। यमुना के दोनों किनारों पर व्रतधारियों को कोई असुविधा न हो इसके निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा शहर में जहां भी छठ पूजा का आयोजन होगा, सरकार वहां भी पूरी व्यवस्था करेगी। आस्था, प्रकृति और भावनाओं से जुड़े इस पर्व को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से मनाएंगे।
छठ पर्व की तैयारियों को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री ने सचिवालय में बैठक की। इसमें मंत्री आशीष सूद, कपिल मिश्रा, मुख्य सचिव धमेंद्र सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना में विसर्जन की मनाही है, लेकिन छठ पर्व में विसर्जन नहीं होता। दूसरी ओर दिल्ली में पूर्वांचलवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनकी धार्मिक आस्था व सुविधा के लिए यमुना के प्रवेश स्थल पल्ला से अंतिम स्थल ओखला तक दोनों किनारों पर छठ पर्व के आयोजन होने चाहिए।
पल्ला से ओखला तक होंगे विशेष इंतजाम
यमुना के दोनों किनारों पर जहां भी समतल किनारे होंगे, वहां पर सरकार की ओर से बिजली, आकर्षक रोशनी, पानी, चिकित्सा, ट्रैफिक पुलिस, नागरिक सुरक्षा पुलिस और बाकी इंतजाम किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश जारी किए हैं। पुराने पूजा स्थानों पल्ला से वजीराबाद, आईटीओ, ओखला के घाटों पर पहले से ज्यादा चौकस व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सफाई, धूल से बचाने के लिए पानी छिड़काव करने को कहा है। सिंचाई विभाग को छठ से पहले यमुना से जलकुंभी निकालने के आदेश मिले हैं।
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नहरों पर बने घाटों पर भी विशेष व्यवस्था
मुनक नहर, मुंगेशपुर ड्रेन, कृत्रिम तालाबों में भी छठ पूजा होगी। करीब 929 स्थानों को पूजा के लिए चिन्हित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थलों पर सरकार पूरी व्यवस्था करेगी। किसी समिति, संस्थान को एनओसी चाहिए तो उसे बिना किसी परेशानी के मिलेगी। वे जल्द ही यमुना व अन्य स्थानों के दौरे शुरू करेंगे, ताकि तैयारियों में देरी न हो। कुछ विशेष पूजा के स्थान भी बनाए जाएंगे।
हरियाणा सरकार से मांगेंगे पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना में अतिरिक्त पानी की जरूरत होगी तो हरियाणा सरकार से मांगा जाएगा। छठ महापर्व पूर्वांचलवासियों की आस्था और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इसे पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाने की पूरी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
इस बार छठ पूजा यमुना नदी के दोनों किनारों पर होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसकी घोषणा की है। यमुना के दोनों किनारों पर व्रतधारियों को कोई असुविधा न हो इसके निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा शहर में जहां भी छठ पूजा का आयोजन होगा, सरकार वहां भी पूरी व्यवस्था करेगी। आस्था, प्रकृति और भावनाओं से जुड़े इस पर्व को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से मनाएंगे।
छठ पर्व की तैयारियों को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री ने सचिवालय में बैठक की। इसमें मंत्री आशीष सूद, कपिल मिश्रा, मुख्य सचिव धमेंद्र सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना में विसर्जन की मनाही है, लेकिन छठ पर्व में विसर्जन नहीं होता। दूसरी ओर दिल्ली में पूर्वांचलवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनकी धार्मिक आस्था व सुविधा के लिए यमुना के प्रवेश स्थल पल्ला से अंतिम स्थल ओखला तक दोनों किनारों पर छठ पर्व के आयोजन होने चाहिए।
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पल्ला से ओखला तक होंगे विशेष इंतजाम
यमुना के दोनों किनारों पर जहां भी समतल किनारे होंगे, वहां पर सरकार की ओर से बिजली, आकर्षक रोशनी, पानी, चिकित्सा, ट्रैफिक पुलिस, नागरिक सुरक्षा पुलिस और बाकी इंतजाम किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश जारी किए हैं। पुराने पूजा स्थानों पल्ला से वजीराबाद, आईटीओ, ओखला के घाटों पर पहले से ज्यादा चौकस व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। सफाई, धूल से बचाने के लिए पानी छिड़काव करने को कहा है। सिंचाई विभाग को छठ से पहले यमुना से जलकुंभी निकालने के आदेश मिले हैं।
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नहरों पर बने घाटों पर भी विशेष व्यवस्था
मुनक नहर, मुंगेशपुर ड्रेन, कृत्रिम तालाबों में भी छठ पूजा होगी। करीब 929 स्थानों को पूजा के लिए चिन्हित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थलों पर सरकार पूरी व्यवस्था करेगी। किसी समिति, संस्थान को एनओसी चाहिए तो उसे बिना किसी परेशानी के मिलेगी। वे जल्द ही यमुना व अन्य स्थानों के दौरे शुरू करेंगे, ताकि तैयारियों में देरी न हो। कुछ विशेष पूजा के स्थान भी बनाए जाएंगे।
हरियाणा सरकार से मांगेंगे पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना में अतिरिक्त पानी की जरूरत होगी तो हरियाणा सरकार से मांगा जाएगा। छठ महापर्व पूर्वांचलवासियों की आस्था और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इसे पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाने की पूरी है।