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छठ महापर्व : चार लोगों से शुरू हुआ अब चार लाख पहुंची संख्या
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 04 Nov 2016 12:03 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सूर्य उपासना का महापर्व छठ 70 के दशक में बाबा फरीद की इस नगरी में महज चार लोगों से शुरू हुआ था लेकिन आज चार लाख लोग यहां इस पर्व को मनाते हैं। इस वर्ष फरीदाबाद की छठ पूजा 45 वर्ष की हो जाएगी। चार दिनों के इस महापर्व के दौरान आप फरीदाबाद में ही मिनी बिहार के दर्शन कर सकते हैं।
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शहर मेें सबसे पहले छठ पूजा 1971-72 में मुझेसर में हुई थी। शुरूआत बहुत कम लोगों से हुई थी। शहर में रहने वाले अन्य लोगों को इस पूजा के वैज्ञानिक महत्व के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उस दौरान पूर्वांचल के लोगों की बहुत कम आबादी थी।
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छठ पूजा के लिए उन्हें पूर्वांचल जाना पड़ता था, लेकिन बुजुर्गों की पहल पर शहर में छठ पूजा की शुरूआत हुई। उस दौरान पूजा की सामग्री भी यहां पर नहीं मिलती थी। कुछ लोगों को बिहार भेजकर पूजा सामग्री को स्पेशल मंगवाना पड़ता था।
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अब समय के साथ छठ पूजा के प्रति इतना क्रेज बढ़ा है कि इसका महत्व समझकर पूर्वांचल के अलावा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लोग भी इससे जुड़ने लगे हैं। छठ पर्व के लिए आगरा कैनाल, गुड़गांव कैनाल के अलावा 150 से ज्यादा घाट तैयार किए गए हैं। इसके अलावा पूर्वांचल समाज के लोगों ने पार्क, मैदान और घरों की छत पर कृत्रिम घाट बनाए हैं, जिनमें पूजा अर्चना की जाएगी।
हर्षोल्लास से मनाया जाता है पर्व
वर्ष 1971-72 में पहली बार छठ पूजा का आयोजन किया गया था। उस समय सीमित संख्या में लोग ही पूजा करते थे। आबादी बढ़ने के साथ अब बिहार का यह महापर्व यहां भी हर्षोल्लास से मनाया जाता है। -अरुण सिंह, अध्यक्ष-डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल ट्रस्ट
संस्कृति से परिचय कराती है पूजा
वर्ष 1987 में छठ पूजा के लिए पानी की शुद्धता थी, अब पानी शुद्ध नहीं रह गया है। शहर में 32 वर्ष से रह रहा हूं। छठ पूजा के बदलाव को बेहद करीब से देखा है। नई पीढ़ी के युवाओं को इसमें जोड़ कर संस्कृति से परिचय कराया जा रहा है। -डॉ. पीके झा, अध्यक्ष अशोका एंक्लेव 3
सूर्य की उपासना का पर्व है यह
छठ पूजा सूर्य की उपासना का पर्व है। नहर में इतनी गंदगी को देखकर मन से पूजा करने का मन नहीं करता है, इसलिए घर की छत पर घाट बनाकर सूर्य को अर्घ्य
समर्पित किया जाएगा। - मीना पांडे, एडवोकेट
नहाय खाय के साथ आज से शुरू होगा
सूर्य उपासना का पर्व शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो जाएगा। चार दिवसीय इस पर्व में पवित्रता के साथ मन को नियंत्रित कर सूर्य की उपासना की जाती है। इसके लिए अस्थायी रूप से बनने वाले करीब 150 से 180 घाट को अंतिम रूप दे दिया गया है। महिलाएं दिनभर घरों में तैयारियां करती नजर आ रही हैं। कॉलोनी एवं सेक्टरों में महिला समूहों ने छठ मइया के गीत गाए।
वह बाजार में छठ पूजा की सामग्री खरीदती नजर आईं। डबुआ कॉलोनी, सेक्टर 22 शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, पल्ला पुल के पास अस्थायी रूप से खरीदारी के बाजार लगे हुए हैं। छठ पूजा पर्व को मनाने वाले लोगों ने इस बार नहर पर जाने के बजाय घर के आसपास एवं अस्थायी जगह पर जाने की व्यवस्था की है।
आर एंड डी में बतौर वैज्ञानिक कार्य कर रहीं स्वाति झा पिछले सात वर्ष से छठ पूजा कर रही हैं। कहती हैं कि शुरूआत में सास को छठ पूजा करते देखा तो सहज ही इससे जुड़ाव हो गया। छठ पूजा के दौरान मांगी गई मनोकामना अब तक सभी पूरी हुई हैं, इसलिए आगे भी छठ पूजा का व्रत करने का निर्णय लिया।
डूबते एवं उगते सूरज को जल अर्पित करने पर चर्म रोग से मुक्ति मिलने के साथ शरीर स्वस्थ रहता है। उद्यमी आरसी चौधरी बताते हैं कि पर्व के प्रति इतनी आस्था है कि कई लोगों को बीमारियों से मुक्त होते देखा।