पड़ोसन के चक्कर में चंद्रमोहन ने भुलाया ये सपना!
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खुद की मौत का झूठा नाटक रचने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन ने करीब डेढ़ साल पहले विधायक पति बनने का ख्वाब पाला था। इसके लिए उसने अपनी पत्नी को आम आदमी पार्टी से भी जोड़ा और जेवर विधान सभा से चुनाव भी लड़ाया।
लेकिन जैसे ही उसकी पड़ोस की लड़की से उसकी नजरें टकराईं तो सारे ख्वाब भूल उसके इश्क में पड़कर अपना भूत और भविष्य नारकीय बना लिया।
साल 2004 में चंद्रमोहन शिवसेना से जुड़ा था। उसके बाद शहर की हरेक गतिविधि में भाग लेने लगा। 2003 तक उन्हें शहर के लोग नहीं जानते थे, लेकिन महाराष्ट्र की एक पार्टी से जुड़ने के बाद से सक्रिय हो गया और जिलाध्यक्ष पद भी संभाला था।
उसके बाद वह अन्य एक राजनैतिक दल में रहने के बाद आम आदमी पार्टी से जुड़ा और काफी सक्रिय तरीके से शहर की हरेक गतिविधि तथा शहरवासियों के दुखदर्द में भाग लेना शुरू कर दिया।
कई बार जेल भी जा चुका है चंद्रमोहन
सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ शहर के लोगों में पहचान बन गई। इसके बाद हरेक व्यक्ति के सुख और दुख में शामिल होकर उनको पारिवारिक संबंध बनाने में जुट गया।
पिछले दिनों हुए विधान सभा के चुनाव में उसने अपनी पत्नी सविता शर्मा को विधायक पद पर चुनाव भी लड़ाया था। कई बार सविता के साथ अनशन किया। भट्टा-पारसौल के लोगों के लिए आंदोलन समेत ऐसे कई मामलों में वह जेल भी गया।
इसी सामाजिकता को निभाते-निभाते पड़ोस की युवती से आंखे चार हो गई और अपनी पत्नी को विधायक बनाने का सपना पीछे छूट गया। पिछले करीब आठ माह से चंद्रमोहन का किसी अन्य कार्यों में दिल नहीं लगता था।
उसका आम आदमी पार्टी की गतिविधियों में भी कोई खासा उत्साह नहीं था। युवती के चक्कर में आकर वह सबकुछ भूल गया और ऐसा कारनामा किया कि वह स्वयं सलाखों के पीछे पहुंच गया।
कहीं नेपाल तो नहीं भाग गया विदेश?
चंद्रमोहन के साले की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने अब तक करीब 40 ठिकानों पर दबिश दी है, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। वह हर दो दिन में नया सिम बदल रहा है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी बंगलूरू में है। हालांकि, उसके नेपाल भागने की भी आशंका जताई जा रही है। उसके मोबाइल की लोकेशन नेपाल बॉर्डर के आसपास मिल रही है।
पुलिस ने विदेश को घटना को अंजाम देने का भागीदार मान लिया है। 40 ठिकानों पर दबिश के बाद भी अभी तक पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है। हर दो दिन में सिम और फोन बदलने के चलते उसकी लोकेशन ट्रेस होने से पहले ही वह भाग जाता है।
जांच अधिकारियों को अंदेशा है कि विदेश कहीं नेपाल या बंगलूरू तो नहीं भाग गया। अधिकारियों का कहना है कि चंद्रमोहन वहां रह चुका है। कहीं ऐसा न हो कि विदेश भी वहीं नई पहचान के साथ रह रहा हो। पुलिस को यह भी अंदेशा है कि कहीं विदेश नेपाल तो नहीं भाग गया। उसके पास काफी रकम होने की जानकारी मिली है।
डीएनए रिपोर्ट से होगी युवक की पहचान
कार में जलने वाले विक्षिप्त युवक की पहचान के मामले में पुलिस अभी खुलासा करने से बच रही है। पुलिस का मानना है कि शिनाख्त के बाद कहीं ऐसा न हो कि वह भी चंद्रमोहन की तरह जिंदा लौट आए। डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी पहचान जाहिर की जाएगी।
एक मई की रात को चंद्रमोहन ने मानसिक रूप से कमजोर एक युवक को कार में जिंदा जला दिया था। चंद्रमोहन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को युवक के बारे में जानकारी तो मिली है लेकिन वह इसका खुलासा करने से बच रही है।
अधिकारियों का कहना है कि कहीं ऐसा न हो कि चंद्रमोहन की तरह युवक भी लौट आए। एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट के बाद ही खुलासा होगा।
पुलिस की मानें तो मई के पहले सप्ताह में ही व्यक्ति के शरीर से कुछ नमूने लिए गए थे, ताकि उसकी डीएनए जांच कराई जा सके। हालांकि, उस समय चंद्रमोहन मानकर ही सैंपल दिए गए थे। अब उसकी शिनाख्त करानी है तो डीएनए टेस्ट कराने के लिए सैंपल भेजा गया है। एसपी के अनुसार, एक-दो सप्ताह में रिपोर्ट आने की उम्मीद है।