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अनंगपुर चकबंदी घोटाला: पीड़ितों को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 04 Jul 2017 06:48 PM IST
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- फोटो : google
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गांव अनंगपुर में 2012-13 में चकबंदी के दौरान हुए घोटाला पीड़ितों को अब न्याय मिलने की उम्मीद है। क्योंकि जिला राजस्व एवं बंदोबस्त अधिकारी (डीआरओ) ने 1152 बीघा जमीन के चकबंदी में घोटाले की बात को स्वीकार करते हुए इसे पूरी तरह से निरस्त करने की सिफारिश की है।
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गांव की कुल आबादी करीब 20 हजार है जिसमें से करीब 19 हजार लोग इस घोटाले से पीड़ित हैं। अब इस सभी को जल्द से जल्द न्याय मिलने की उम्मीद है। इस मामले को उजागर करने वाले वह इसके विरोध में आवाज उठाने वाले अनंगपुर जनहित विकास समिति के अध्यक्ष ऋषिपाल भड़ाना ने कहा कि यह ग्रामीणों की जीत है। इसके लिए उन्होंने गांव वालों की तरह से मुख्यमंत्री, जिला उपायुक्त व डीआरओ के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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चकबंदी घोटाले को लेकर ऋषिपाल ने कहा कि इस मामले में हुडा का एक अधिकारी लगातार-भूमाफियाओं को बचाने के काम में लगा रहा। उन्होंने कहा कि इस मामले में ग्रामीणों के संघर्ष ने अपनी जीत हासिल की है।
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उन्होंने कहा कि इस मामले में सकारात्मक मोड़ तब आया जब शहर के गुरुकुल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसी दौरान सीएम ने इस मामले की जांच का देश उपायुक्त व डीआरओ को दे दिया था।
भड़ाना ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते तो कुछ अधिकारी और कर्मचारी भू-माफिआयों के साथ मिलकर अपना गंदा खेल खेलते रहते।
डीआरओ की सिफारिश में सिर्फ चंकबंदी को निरस्त करने की ही बात नहीं कही गई है बल्कि सभी चकबंदी स्टॉफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए भी लिखा गया है।
डीआरओ ने अपने 10 पेज की रिपोर्ट में 22 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। भड़ाना ने बताया कि इस घोटाले के खिलाफ उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर अपने हक के लिए कड़ा संघर्ष किया है।
इस दौरान भू-माफियाओं की ओर से धमकी भी दी गई। इसके बावजूद संघर्ष करते रहे जिसका यह सुखद परिणाम मिला है। उम्मीद है कि जल्द सभी को न्याय मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि चकबंदी स्टॉफ ने भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए जोहड़, तालाब, शमशान, रास्ता और पहाड़ी की जमीन पर कब्जा दे दिया था।
उन्होंने बताया कि उस समय चकबंदी स्टॉफ में एसीओ दलबीर, एसीओ रोशनलाल, गिरदावर सतवीर, पटवारी मंगत, पटवारी राधे, पटवारी लाल बहादुर, पटवारी परवीन, पटवारी श्रद्धानंद व पटवारी मोहम्मद शेर शामिल थे।