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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Centre asked to respond on how names should be printed in educational records after amendment in transgender law

Delhi NCR News: ट्रांसजेंडर कानून संशोधन के बाद शैक्षणिक रिकॉर्ड में नाम कैसे छपें, केंद्र से मांगा जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 09:17 PM IST
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जन्म से आधार तक, ट्रांसजेंडर पहचान पर बन सकते हैं नए नियम
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (ट्रांसजेंडर पर्सन्स) के नाम शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और रिकॉर्ड में कैसे प्रकाशित किए जाएं, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख मांगा है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने यह आदेश दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा जारी प्रमाणपत्रों तथा रिकॉर्ड में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
अदालत ने कहा कि इस मामले में दिए जाने वाले निर्देश केवल शैक्षणिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस तथा अन्य सरकारी दस्तावेजों पर भी लागू हो सकते हैं। इसलिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार को सभी तीन याचिकाओं में पक्षकार बनाया है। 9 अप्रैल को दिए आदेश में अदालत ने कहा कि अदालत की राय है कि इन मामलों में भारत संघ की स्थिति सुनना आवश्यक है। अदालत ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव को छह सप्ताह के अंदर सभी मामलों में हलफनामा देकर अपना स्टैंड स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
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खंडपीठ ने केंद्र सरकार के वकीलों से मंत्रालय से निर्देश लेने को कहा और स्पष्ट किया कि यदि जरूरी हो तो मंत्रालय अन्य मंत्रालयों से भी उचित राय ले सकता है, ताकि व्यापक निर्देश जारी किए जा सकें। सीबीएसई की ओर से पेश वकील ने बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों की सुरक्षा) संशोधन अधिनियम, 2026 के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा अपडेट कर दी गई है। नई व्यवस्था में अलग-अलग यौनिक अभिविन्यास और स्व-धारित यौनिक पहचान वाले व्यक्ति अब इस परिभाषा में शामिल नहीं किए जाएंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को तय की है।
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