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सोशल साइंस में शोध पर फोकस करेगी सरकार, एचआरडी मंत्री ने कहा- ब्रेन ड्रेन को करेंगे ब्रेन गेन

Fri, 26 Oct 2018 03:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 26 Oct 2018 03:46 AM IST
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Central Government will now focus on research in social science instead of science and engineering
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर

केंद्र सरकार अब साइंस व इंजीनियरिंग की बजाय सोशल साइंस में शोध व अनुसंधान पर फोकस करेगी। इसके लिए इंप्रैस (इंपेक्टफुल पॉलिसी रिसर्च इन सोशल साइंस) योजना लागू की गई है। इसमें लोकतंत्र, मीडिया, सोशल, संस्कृति, रोजगार, कौशल, सुशासन, आर्थिक नीति, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा पर सामाजिक आयाम पर शोध होगा। रिसर्च के आधार पर सरकार अपनी पॉलिसी में बदलाव करेगी। खास बात यह है कि दो साल में पंद्रह सौ प्रोजेक्ट के लिए 418 करोड़ रुपये खर्च होंगे जबकि प्रति शोधार्थी को 20 से 25 लाख रुपये दिए जाएंगे।

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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को आईसीएसएसआर (इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च) की इंप्रैस योजना व पोर्टल की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अब सामाजिक विज्ञान में शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, स्पार्क में देशी और विदेशी विश्वविद्यालय मिलकर ब्रेन ड्रेन को करेंगे ब्रेन गेन करेंगे। आईसीएसएसआर की वेबसाइट पर आवेदन विंडो ओपन हो चुकी है। केंद्रीय, निजी व राज्य सरकार के एनआईआरएफ में बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थान आवेदन कर पाएंगे जबकि सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी शोधार्थी बनने का मौका मिल रहा है।  
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विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शोध का मौका देगा स्पार्क
सरकार साइंस व टेक्नोलॉजी के छात्रों के लिए स्पार्क (स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ अकेडमिक एंड रिसर्च कोलाब्रेेशन) योजना ला रही है। इसमें दो विदेशी विश्वविद्यालय व दो भारतीय विश्वविद्यालय दो छात्रों के साथ मिलकर शोध करेंगे। जिसमें एडवांस्ड इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन, एडवांस्ड फंक्शनल एंड मेटा मैटीरियल, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डिजिटल ह्यूमैनिटीज व इंफेक्शन डिसीज एंड क्लीनिक रिसर्च पर विशेष रूप से शोध होगा। स्पार्क में एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप सौ वाले संस्थान आवेदन कर सकते हैं जबकि विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए क्यूएस टॉप 500 वाले ही मान्य होंगे। आईआईटी खड़गपुर योजना में सहयोग करेगा। दो साल में 418 करोड़ रुपये के बजट में छह सौ प्रोजेक्ट पर शोध होगा। प्रति शोधार्थी 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की धनराशि मिलेगी। इसमें 254 भारतीय तो 478 विदेशी विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे। 

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