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गार्डन ट्रेंस नेवर एनएफ म्यूजियम पर्यटकों का बना आर्कषण का केंद्र
मौ. शाहिद मेवाती/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 21 Oct 2016 09:17 AM IST
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तावड़ू कंट्री क्लब के समीप गार्डन ट्रेंस नेवर एनएफ म्यूजियम बनाया गया है। यह यूजियम देश विदेश के पर्यटकों के बेहद आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तीस साल पहले बने विभिन्न प्रकार के ट्रैन मॉडल्स को यूजियम में बेहतरीन तरीके से सजाया गया है।
यूजियम को रेल मॉडल ट्रस्ट में परिवर्तित किया जायेंगा। जिसके बाद क्षेत्र के युवाओं व ग्रमीणों को इसमें रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। म्यूजियम में विभिन्न प्रकार के विंड मॉडल व अनेकों प्रकार के रेलवे पटरी का मॉडल व आपदा प्रबंधन मॉडल हाथ से बनाये गए है।
यहां पर आने वाले पर्यटकों व स्कूली बच्चों को एक विशेष प्रकार की स्किल डेवलपमेंट की प्रेरणा मिलती है। विभिन्न परिस्थतियों में आग से निबंटने का भी तरीका भी भवन नुमा निर्मित बिल्डिंग में आग लगा कर पर्यटकों को बताया जाता है।
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यूजियम हते में दो दिन रविवार व शनिवार को खोला जाता है। इसके अलावा यह विशेष आग्रह पर भी यह खोला जाता है। यूजियम में आम पर्यटकों के लिए 550 रुपये की फीस प्रति व्यक्ति है व् स्कूली बच्चो के लिये 330 रुपये की फीस रखी गई है। जिसमे बच्चो की ड्राइंग के सामग्री समिलित है।
यूजियम का मुय उद्देश्य है लोंगो को व् बच्चो को हस्त कलां के प्रति जागरूक कर उन्हें स्किल इंडिया व मेक इन इंडिया के प्रति आर्कशित करना है। इस यूजियम की खास बात ये है कि जो मॉडल दिखाने के लिये लगाए हुए है वो खुले पार्क में स्थापित किए गए है।
जिनका बरसात ,सर्दी व गर्मी के मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। पर्यटकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है। पर्यटकों नेवर एनफगार्डनरेलवे की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाईन आवेदन कर सकते है।
म्यूजियम में सात सदस्य का स्टाफ नियुक्ति किया गया है। म्यूजियम में सफाई सफाई पर विशेष दिया जाता है। काबिलेगौर है की तावडू कंट्री क्लब गांव पाड़ा के पास करीब डेढ़ एकड़ में बना ये म्यूजियम 2015 में चालू किया गया था।
म्यूजियम में रेलवे प्लेटफार्म मॉडल ,एयरपोर्ट मॉडल ,डैम मॉडल,ज़ू मॉडल,व् हाथ से बने झरने व् पहाड़ो के मॉडल निर्मित है। बचपन से ही हस्तकलां के शौकीन रहे यूजिम के संचालक आदेश ग्रोवर ने बताया की उन्होंने घर पर शुरू से ही विभिन्न मॉडलों के नमूने इक्कठा कर रखे थे।
उन्हीं के आधार पर यूजियम में हाथ से बनाएं गए पुराने मॉडल स्थापित किए गए है। ग्रोवर व् उनकी पत्नी अमित ग्रोवर ने इसको बनाने में कड़ी मेहनत की ओर दोनों ही यूजियम का संचालन कर रहे है। यूजियम में मौजूद रेल मॉडल व पटरी को देखने पर लोगों को पता चलता है की किस प्रकार रेल की पटरी कहा से गुजरती है।
यूजियम के संचालक आदेश ग्रोवर ने बताया की जल्द ही म्यूजियम को रेल मॉडल ट्रस्ट में परिवर्तित किया जायेंगा। जिसके प्रयास जारी है। म्यूजियम को 2016 ट्रीप एडवाइजर का सर्टिफिकेट आफ एक्सिलेंस मिल चूका है। वर्ष 2015 में भी नेशनल स्टीम अवार्ड से म्यूजियम को किया गया है। शनिवार व् रविवार को काफी संख्या में देश व विदेश से पर्यटक यहां आते हैं।
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यूजियम को रेल मॉडल ट्रस्ट में परिवर्तित किया जायेंगा। जिसके बाद क्षेत्र के युवाओं व ग्रमीणों को इसमें रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। म्यूजियम में विभिन्न प्रकार के विंड मॉडल व अनेकों प्रकार के रेलवे पटरी का मॉडल व आपदा प्रबंधन मॉडल हाथ से बनाये गए है।
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यहां पर आने वाले पर्यटकों व स्कूली बच्चों को एक विशेष प्रकार की स्किल डेवलपमेंट की प्रेरणा मिलती है। विभिन्न परिस्थतियों में आग से निबंटने का भी तरीका भी भवन नुमा निर्मित बिल्डिंग में आग लगा कर पर्यटकों को बताया जाता है।
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यूजियम हते में दो दिन रविवार व शनिवार को खोला जाता है। इसके अलावा यह विशेष आग्रह पर भी यह खोला जाता है। यूजियम में आम पर्यटकों के लिए 550 रुपये की फीस प्रति व्यक्ति है व् स्कूली बच्चो के लिये 330 रुपये की फीस रखी गई है। जिसमे बच्चो की ड्राइंग के सामग्री समिलित है।
यूजियम का मुय उद्देश्य है लोंगो को व् बच्चो को हस्त कलां के प्रति जागरूक कर उन्हें स्किल इंडिया व मेक इन इंडिया के प्रति आर्कशित करना है। इस यूजियम की खास बात ये है कि जो मॉडल दिखाने के लिये लगाए हुए है वो खुले पार्क में स्थापित किए गए है।
जिनका बरसात ,सर्दी व गर्मी के मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। पर्यटकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है। पर्यटकों नेवर एनफगार्डनरेलवे की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाईन आवेदन कर सकते है।
म्यूजियम में सात सदस्य का स्टाफ नियुक्ति किया गया है। म्यूजियम में सफाई सफाई पर विशेष दिया जाता है। काबिलेगौर है की तावडू कंट्री क्लब गांव पाड़ा के पास करीब डेढ़ एकड़ में बना ये म्यूजियम 2015 में चालू किया गया था।
म्यूजियम में रेलवे प्लेटफार्म मॉडल ,एयरपोर्ट मॉडल ,डैम मॉडल,ज़ू मॉडल,व् हाथ से बने झरने व् पहाड़ो के मॉडल निर्मित है। बचपन से ही हस्तकलां के शौकीन रहे यूजिम के संचालक आदेश ग्रोवर ने बताया की उन्होंने घर पर शुरू से ही विभिन्न मॉडलों के नमूने इक्कठा कर रखे थे।
उन्हीं के आधार पर यूजियम में हाथ से बनाएं गए पुराने मॉडल स्थापित किए गए है। ग्रोवर व् उनकी पत्नी अमित ग्रोवर ने इसको बनाने में कड़ी मेहनत की ओर दोनों ही यूजियम का संचालन कर रहे है। यूजियम में मौजूद रेल मॉडल व पटरी को देखने पर लोगों को पता चलता है की किस प्रकार रेल की पटरी कहा से गुजरती है।
यूजियम के संचालक आदेश ग्रोवर ने बताया की जल्द ही म्यूजियम को रेल मॉडल ट्रस्ट में परिवर्तित किया जायेंगा। जिसके प्रयास जारी है। म्यूजियम को 2016 ट्रीप एडवाइजर का सर्टिफिकेट आफ एक्सिलेंस मिल चूका है। वर्ष 2015 में भी नेशनल स्टीम अवार्ड से म्यूजियम को किया गया है। शनिवार व् रविवार को काफी संख्या में देश व विदेश से पर्यटक यहां आते हैं।