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परिवहन विभाग की बसों में लगेगा सीसीटीवी कैमरा, दिल्ली कैबिनेट ने दी मंजूरी
Sun, 03 Mar 2019 04:03 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 03 Mar 2019 04:03 AM IST
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दिल्ली कैबिनेट ने परिवहन विभाग के बसों में सीसीटीवी कैमरा, ऑटोमेटिक व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन व पैनिक अलार्म लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूर किया है। कैबिनेट ने परिवहन मंत्री को इस प्रोजेक्ट की सेवा-शर्तें का तय करने के लिए अधिकृत किया है।
अधिकारी बताते हैं कि सभी 1000 बसें एक साथ नहीं आएगी। इन्हें अलग-अलग मे चरणों में उतारा जाएगा। पहले फेज के टेंडर की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होगी। इस फेज की बसें 2019 तक सड़क पर आ जाएंगी।
पहले से चल रहा ट्रायल सफल
दिल्ली सरकार ने एक हजार इलेक्ट्रिक बसों को राजधानी की सड़कों पर उतारने के पहले इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल शुरू कर दिया था। 522 नंबर रूट पर आंबेडकर नगर टर्मिनल से इंद्रपुरी (कृषि कुंज) के बीच एक इलेक्ट्रिक बस चलाई जा रही है।
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अधिकारी बताते हैं कि ई-बस का ट्रायल सफल रहा है। बसों का ऑपरेशनल कॉस्ट प्रति किलोमीटर 80-100 रुपये बीच आएगा। इलेक्ट्रिक बस चॉर्ज करने में 6 से 7 घंटे का समय लगेगा। एक बार फुल चॉर्ज होने पर बस करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।
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अधिकारी बताते हैं कि सभी 1000 बसें एक साथ नहीं आएगी। इन्हें अलग-अलग मे चरणों में उतारा जाएगा। पहले फेज के टेंडर की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होगी। इस फेज की बसें 2019 तक सड़क पर आ जाएंगी।
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पहले से चल रहा ट्रायल सफल
दिल्ली सरकार ने एक हजार इलेक्ट्रिक बसों को राजधानी की सड़कों पर उतारने के पहले इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल शुरू कर दिया था। 522 नंबर रूट पर आंबेडकर नगर टर्मिनल से इंद्रपुरी (कृषि कुंज) के बीच एक इलेक्ट्रिक बस चलाई जा रही है।
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अधिकारी बताते हैं कि ई-बस का ट्रायल सफल रहा है। बसों का ऑपरेशनल कॉस्ट प्रति किलोमीटर 80-100 रुपये बीच आएगा। इलेक्ट्रिक बस चॉर्ज करने में 6 से 7 घंटे का समय लगेगा। एक बार फुल चॉर्ज होने पर बस करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।
फैक्ट फाइल
-ई-बसों को 6 डिपो में पार्क किया जाएगा, जहां चार्जिंग का पूरा बुनियादी ढांचा होगा।
-चार्जिंग सिस्टम तक बिजली पहुंचाने का जिम्मा सरकार पर पर होगा।
-चार्जिंग का बुनियादी ढांचा व चार्जिंग प्वाइंट सेवा प्रदाता कंपनी तैयार करेगी।
-सरकार ई-बसों पर सब्सिडी देगी। सब्सिडी की राशि प्रति बस 75 लाख रुपये या कुल कीमत का 60 फीसदी (जो भी कम हो) होगी। इसे तीन किश्तों में जारी किया जाएगा।
-सब्सिडी व डिपो में चार्र्जिंग का बुनियादी ढांचा तैयार करने पर 800 करोड़ रुपये खर्च होगा। इसके बजट का इंतजाम एनवायरमेंट कंपनसेंशन चार्ज (ईसीसी) फंड से होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ईसीसी फंड का निर्माण 1100 करोड़ से किया गया था।
-बसों के संचालन व उसके रखरखाव का जिम्मा सेवा प्रदाता पर होगा।
-सरकार सब्सिडी के अलावा निजी कंपनी को प्रति किलोमीटर के हिसाब भुगतान की दर तय करेगी।
-चार्जिंग सिस्टम तक बिजली पहुंचाने का जिम्मा सरकार पर पर होगा।
-चार्जिंग का बुनियादी ढांचा व चार्जिंग प्वाइंट सेवा प्रदाता कंपनी तैयार करेगी।
-सरकार ई-बसों पर सब्सिडी देगी। सब्सिडी की राशि प्रति बस 75 लाख रुपये या कुल कीमत का 60 फीसदी (जो भी कम हो) होगी। इसे तीन किश्तों में जारी किया जाएगा।
-सब्सिडी व डिपो में चार्र्जिंग का बुनियादी ढांचा तैयार करने पर 800 करोड़ रुपये खर्च होगा। इसके बजट का इंतजाम एनवायरमेंट कंपनसेंशन चार्ज (ईसीसी) फंड से होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ईसीसी फंड का निर्माण 1100 करोड़ से किया गया था।
-बसों के संचालन व उसके रखरखाव का जिम्मा सेवा प्रदाता पर होगा।
-सरकार सब्सिडी के अलावा निजी कंपनी को प्रति किलोमीटर के हिसाब भुगतान की दर तय करेगी।