सीबीआई करेगी अवैध निर्माण की जांच
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हाईकोर्ट ने दक्षिणी दिल्ली की चार कॉलोनियों में अवैध निर्माण को रोकने के लिए स्थानीय निकायों की लापरवाही को गंभीरता से लिया है।
अदालत ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए एमसीडी अधिकारियों, पुलिस व बिल्डरों की भूमिका की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने याची पर लगे ब्लैकमेलिंग के आरोप की भी जांच का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है। अदालत ने पिछले 13 माह में पुलिस व एमसीडी को नेब सराय, फ्रीडम फाइटर कॉलोनी, सहदुल्ला जाब व पर्यावरण कांप्लेक्स में हो रहे अवैध निर्माण की जांच के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आया। स्पष्ट है कि एमसीडी व पुलिस अधिकारियों का बिल्डरों से गठजोड़ है।
अदालत ने कहा कि ऐसे में उनका मानना है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अदालत ने सीबीआई को आरंभिक मामला दर्ज कर सभी की भूमिका की जांच कर छह सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में याची पर भी ब्लैकमेल के आरोप लगे हैं ऐसे में उसकी भूमिका की भी जांच जरूरी है।
अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह याची की भूमिका की भी जांच कर बताएं कि क्या वह अवैध निर्माण की आड़ में ब्लैकमेल तो नहीं कर रहा। अदालत ने पुलिस उपायुक्त, एमसीडी राजस्व विभाग के उपायुक्त, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड, बीएसईएस व डीडीए को जांच में सीबीआई को पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि वे सीबीआई द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध करवाए। अदालत ने पिछली सुनवाई में इस मामले में सीबीआई को पक्ष बनाते हुए जवाब मांगा था। याची ने आरोप लगाया था कि एमसीडी, पुलिस व बिल्डरों के गठजोड़ के चलते क्षेत्र में अवैध निर्माण जोरों पर है।
कुछ ही वर्षों में क्षेत्र में चार हजार से ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं, जबकि इन स्थानों पर पहले खुला मैदान था। शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। अदालत ने मामले की सुनवाई 4 अप्रैल तय की है।